
मनेन्द्रगढ़ (छत्तीसगढ़ उजाला)। मनेन्द्रगढ़ शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह मेडिकल स्टोर्स बिना फार्मासिस्ट के संचालित हो रहे हैं और जहाँ फार्मासिस्ट है भी तो वे हर समय उपस्थित नहीं रहते, एमसीबी जिले में नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 70 से 80 मेडिकल स्टोर संचालित हैं मेडिकल स्टोर्स संचालन के लिए कुछ डिग्री, सर्टिफिकेट के साथ नियमों के आधार पर लाइसेंस जारी किए जाते हैं,लेकिन वर्तमान में संचालन की जमीनी हकीकत इससे काफ़ी अलग है। क्षेत्र के कुछ मेडिकल व्यवसायी नियमों को ताक पर रख कर मेडिकल स्टोर का संचालन कर रहे हैं। मेडिकल स्टोर में एक मालिक (प्रोपराइटर ),एक फार्मासिस्ट होता है और कुछ मालिक स्वयं फार्मासिस्ट भी है कुछ मेडिकल स्टोर संचालको के द्वारा बिना फार्मासिस्ट के संचालन हो रहा तो कुछ फार्मासिस्ट की अनुपस्थिती में दवाई दुकान का संचालन कर रहें है। ऐसा भी देखने को मिल रहा की मेडिकल स्टोर में अनुभहीन व्यक्तियों के द्वारा दवाई दी जा रही है जिनको दवाइयों की पूरी जानकारी भी नहीं है। इन मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ न तो ड्रग इंस्पेक्टर कार्रवाई करते हैं और ना ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। मेडिकल स्टोर में कार्यरत स्टॉफ बिनाअनुभव के दवाइयां देते है जिससे मरीजों की जान को खतरा बना रहता है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो नियमों को ताक पर रखकर नगर के मेडिकल स्टोर चल रहे हैं।
मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रहे फर्जी क्लिनिक
ग्रामीण क्षेत्रो में जगह जगह मेडिकल स्टोर की आड़ में अवैध क्लिनिक चलाए जा रहे है। चिकित्सा विभाग को इसकी भनक है इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। इन मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा मरीजों से मन माना फीस वसूली जाती है। ऐसे में अगर गलत दवा देने से केस बिगड़ जाता,तब उन्हें बड़े अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है ऐसे फर्जी क्लिनिक संचालक सादे कागज पर दवाई लिखते है जिसमें इलाज किये जाने से संबंधित कोई प्रमाण नहीं होता, ऐसे में अगर मरीज की सेहत पर गलत असर (नुकसान)होता है तो बिना सबूत के इन पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो पाती है।
ऐसा कुछ है तो हम निरिक्षण करेंगे और कुछ ऐसा पाया गया तो टी एन सी के तहत अग्रिम कार्यवाही की जाएगी …
आलोक मिंज, औषधि निरीक्षक एमसीबी