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बर्खास्तगी के बाद भी शासकीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर!
धौराटीकरा समिति के पूर्व प्रबंधक अजय साहु पर गंभीर आरोप, संरक्षण देने वाले अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में


कोरिया(छत्तीसगढ़ उजाला)
धौराटीकरा सेवा सहकारी समिति में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे कथित कृत्यों ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। समिति के तत्कालीन प्रबंधक अजय साहु को 14 नवम्बर 2025 को विधिवत रूप से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, इसके बावजूद उनके द्वारा शासकीय दस्तावेजों में हस्तक्षेप करते हुए हस्ताक्षर कर विभागों को पत्राचार भेजने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धौराटीकरा समिति के दो कर्मचारियों ने विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। उक्त शिकायत के संबंध में 15 दिसम्बर 2025 को जो जवाब एवं दस्तावेज संबंधित विभाग को भेजे गए, उन पर सेवा से बर्खास्त किए जा चुके अजय साहु के हस्ताक्षर पाए गए। यह स्थिति अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करती है कि जब एक माह पूर्व ही अजय साहु को पद से हटा दिया गया था, तो उन्हें शासकीय पत्राचार करने और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार किसके आदेश से दिया गया।
नियमों के तहत सेवा से बर्खास्त किसी भी व्यक्ति का शासकीय दस्तावेजों से कोई संबंध नहीं रहता। ऐसे में दस्तावेजों का निर्माण, उन पर हस्ताक्षर करना तथा विभाग को प्रेषित करना न केवल गंभीर अनियमितता है, बल्कि शासकीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ एवं फर्जी हस्ताक्षर जैसे अपराधों की श्रेणी में भी आता है।
जानकारों का कहना है कि यह मामला केवल एक पूर्व कर्मचारी की मनमानी तक सीमित नहीं प्रतीत होता, बल्कि इसके पीछे विभागीय संरक्षण की आशंका भी गहराती जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार सहकारिता विभाग के कुछ अधिकारियों, विशेषकर उप संचालक स्तर पर, अजय साहु को संरक्षण दिया जा रहा है। यदि ऐसा नहीं होता, तो बर्खास्त व्यक्ति के हस्ताक्षरयुक्त दस्तावेज विभागीय स्तर पर कैसे स्वीकार किए गए—यह प्रश्न अत्यंत गंभीर है।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। समिति से जुड़े किसानों एवं कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की गंभीर अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में इससे भी बड़े घोटाले सामने आ सकते हैं। शासकीय दस्तावेजों की विश्वसनीयता बनाए रखने और प्रशासनिक साख की रक्षा के लिए त्वरित एवं कठोर कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।
अब आवश्यकता है कि सेवा से बर्खास्त पूर्व प्रबंधक अजय साहु के विरुद्ध शासकीय दस्तावेजों से छेड़छाड़, नियमों की अवहेलना एवं फर्जी हस्ताक्षर के मामलों में विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन अधिकारियों की भूमिका इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध प्रतीत हो रही है, उनकी भी निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय की जाए, ताकि शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता बनी रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रशांत गौतम

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