वातायन के साहित्यिक मंच पर ‘शब्दांजलि’ का भव्य विमोचन, साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति

जबलपुर।
वातायन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, उमरिया द्वारा संस्था के संस्थापक स्व. पंडित रामनरेश मिश्र की स्मृति में एक भव्य साहित्यिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जगदीश प्रसाद पयासी ने की, जबकि डॉ. परमानंद तिवारी मुख्य अतिथि तथा टी.एस. चतुर्वेदी, प्रो. अशोक श्रीवास्तव और डॉ. राकेश सोनी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।
इस गरिमामयी आयोजन में बिरसिंहपुर पाली निवासी स्व. रामचन्द्र प्रसाद कर्ण की काव्य कृति ‘शब्दांजलि’ का विधिवत विमोचन किया गया। साहित्यिक भावनाओं से ओत-प्रोत इस क्षण ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में देशभर से आए 28 से अधिक साहित्यकारों, कवियों और समाजसेवियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से अनिल मिश्र, लवलेश कुमार कर्ण, कवि संगम त्रिपाठी, डॉ. पी.के. मिश्र ‘सुरेश’, सुरेश अवधिया, अनंत उपाध्याय, अशोक अवधिया सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
वातायन संस्था के पदाधिकारियों एवं सहयोगियों — राजकुमार महोबिया, संतोष कुमार द्विवेदी, चन्द्र किशोर चंदन, डॉ. नियाज अहमद, मुकेश त्रिपाठी, शंभू सोनी, राकेश उरमलिया, संपत नामदेव, भूपेन्द्र त्रिपाठी, राम लखन सिंह चौहान, विनोद शुक्ल, मोहम्मद शारिब, शिवांश सिंह सेंगर, करन सिंह, शिवानंद पटेल, सत्येन्द्र गौतम, प्रेमशंकर मिर्जापुरी, किशोर नामदेव, गणेश दत्त गौतम, एम.डी. सिद्दीकी, शरद जायसवाल, चन्द्र किशोर श्रीवास्तव एवं रविन्द्र रवि का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा।
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने में डॉ. अरुणा पांडेय, विजय बागरी, आशा निर्मल जैन, अजय कुमार झा (जनकपुर, नेपाल) सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आए कवि, कवयित्रियों और साहित्य मनीषियों की सक्रिय सहभागिता रही।
विशेष उल्लेखनीय है कि ‘शब्दांजलि’ के प्रकाशन और विमोचन का यह भगीरथ प्रयास वरिष्ठ साहित्यकार कवि अनिल मिश्र की प्रेरणा और अथक प्रयासों का प्रतिफल है। उनकी साहित्यिक दृष्टि से यह कृति “अहिल्या-सी उद्धार पाकर” अब जन-जन को समर्पित हो सकी।
यह आयोजन न केवल स्वर्गीय रचनाकार को श्रद्धांजलि था, बल्कि समकालीन हिंदी साहित्य के प्रति सामूहिक समर्पण और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त उदाहरण भी बना।




