गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ

ग्राम पंचायत “झाबर” में 456 हितग्राहियों के राशन पर सवाल: फिंगरप्रिंट लगे, चावल गायब! निष्पक्ष जांच व एफआईआर की मांग


गौरेला–पेंड्रा–मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)
ग्राम पंचायत झाबर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत जनवरी माह के चावल वितरण को लेकर गंभीर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। गांव के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) पेंड्रारोड को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
आरोप किस पर?
शिकायत के अनुसार, संबंधित राशन दुकान का संचालन नवा बिहान महिला स्वसहायता समूह, कूदरी द्वारा किया जा रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि समूह ने 456 हितग्राहियों को चावल वितरण नहीं किया, जबकि उनसे बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट लेकर ऑनलाइन पोर्टल में वितरण दर्ज कर दिया गया।
ग्रामीणों का दावा है कि पोर्टल पर चावल वितरण दिखाया जा रहा है, लेकिन कई परिवारों को वास्तविक रूप से उनका हक का राशन नहीं मिला।

बड़ा सवाल: सिस्टम में एंट्री, तो चावल गया कहां?
गांव में सबसे बड़ा प्रश्न यही उठ रहा है कि जब ऑनलाइन रिकॉर्ड में वितरण दर्ज है, तो फिर खाद्यान्न आखिर गया कहां?
ग्रामीणों ने प्रशासन से निम्न बिंदुओं पर विस्तृत जांच की मांग की है—
स्टॉक रजिस्टर और ऑनलाइन एंट्री का मिलान
जनवरी माह के आबंटन एवं वितरण का भौतिक सत्यापन
बायोमेट्रिक लॉग की तकनीकी जांच
कुल चावल की मात्रा में अंतर का स्पष्ट विवरण
ग्रामीणों का कहना है कि केवल कागजी जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि वास्तविक स्टॉक का मिलान और तकनीकी सत्यापन आवश्यक है।
कार्रवाई की मांग
सरपंच एवं ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
पूरे मामले की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
प्रभावित 456 हितग्राहियों को उनका लंबित राशन तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
पीडीएस व्यवस्था पर उठे सवाल
झाबर का यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। यह प्रकरण पीडीएस व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि प्रशासनिक जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं—क्या आरोप सिद्ध होंगे या संबंधित समूह को क्लीन चिट मिलेगी। फिलहाल ग्रामीण निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

नोट: आरोपों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्रशांत गौतम

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