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छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में घोटालों की परतें खुलीं: 115 करोड़ ओवरटाइम के बाद 67 करोड़ बोनस-हॉलीडे पे की बंदरबांट, 600 करोड़ ओवररेट का भी शक, अधिकारियों पर गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ उजाला-छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग से जुड़ा एक और बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। पहले 115 करोड़ रुपए के ओवरटाइम घोटाले ने हड़कंप मचाया था, और अब जांच में कर्मचारियों के बोनस और हॉलीडे-पे से जुड़े करीब 67 करोड़ रुपए के गबन का खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले ने विभागीय कामकाज और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्मचारियों का हक मारा गया
जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की पड़ताल में सामने आया है कि शराब दुकानों में तैनात 3 हजार से अधिक कर्मचारियों के लिए शासन द्वारा जारी बोनस और हॉलीडे-पे की राशि उन तक पहुंची ही नहीं। यह कर्मचारी बेहद कम वेतन—करीब 8 हजार रुपए मासिक—पर काम कर रहे थे, लेकिन उनका हक भी अधिकारियों ने हड़प लिया।
67 करोड़ का गबन कैसे हुआ?
जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) ने राज्य की 741 शराब दुकानों के संचालन के लिए पांच प्लेसमेंट कंपनियों को ठेका दिया था—
टू जेड इंफ्रा सर्विसेज
प्राइम वन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड
सुमित फैसिलिटीज
अलर्ट कमांडोस
ईगल हंटर सॉल्यूशन
इन कंपनियों के जरिए कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और हॉलीडे-पे का डेटा तैयार कर शासन को भेजा गया। शासन ने भुगतान के लिए करोड़ों रुपए जारी भी किए, लेकिन आरोप है कि यह रकम कर्मचारियों तक पहुंचने के बजाय अधिकारियों और संबंधित लोगों के बीच बांट ली गई।
ओवरटाइम से लेकर हॉलीडे-पे तक खेल
पहले सामने आए 115 करोड़ के ओवरटाइम घोटाले में भी इसी तरह फर्जी रिपोर्टिंग कर रकम निकाली गई थी। अब खुलासा हुआ है कि छुट्टी के दिनों में काम करने के एवज में मिलने वाले करीब 50 करोड़ रुपए के हॉलीडे-पे भी कर्मचारियों को नहीं दिए गए।
600 करोड़ का ओवररेट घोटाला भी सामने
मामला यहीं नहीं रुका। जांच में यह भी सामने आया है कि शराब को एमआरपी से अधिक दाम पर बेचा गया और डुप्लीकेट होलोग्राम के जरिए सप्लाई की गई, जिससे करीब 600 करोड़ रुपए से अधिक का ओवररेट घोटाला हुआ।

बलौदाबाजार के कर्मचारी डीके वर्मा ने बताया कि उन्हें पिछले 7 महीनों से न तो ओवरटाइम मिला और न ही बोनस। हर महीने करीब 8 हजार रुपए का भुगतान बनता था, लेकिन उन्हें एक भी रुपया नहीं मिला।
बड़े अधिकारियों और नेताओं पर शक
ईओडब्ल्यू और ईडी की जांच में संकेत मिले हैं कि इस पूरे घोटाले में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी और कुछ राजनीतिक चेहरे भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अब तक किसी बड़े नाम पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
मामले में नई एफआईआर दर्ज की गई है और जांच एजेंसियां गहराई से पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इस घोटाले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
यह पूरा मामला न सिर्फ भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों के शोषण को भी उजागर करता है, जिनके हक का पैसा सिस्टम के भीतर ही गायब कर दिया गया।

प्रशांत गौतम

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