बिलासपुर

*एक लाख रुपए मांगने और आरक्षक का सोते हुए विडियो वायरल, एएसपी ने कहा – एक साल पुराना है विडियो*

छत्तीसगढ़ उजाला - प्रतीक सोनी

 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। सिविल लाइन थाना परिसर से जुड़े एक कथित वायरल ऑडियो ने पुलिस महकमे में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। ऑडियो में करीब एक साल पुराने वीडियो को आधार बनाकर थाने में पदस्थ एक आरक्षक पर दबाव बनाने और उससे एक लाख रुपये की मांग किए जाने के आरोप सामने आए हैं। मामले में थाना स्टाफ के एक अन्य कांस्टेबल, दो पत्रकारों और एक कथित मध्यस्थ की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

एक साल पुराने वीडियो को लेकर विवाद

जानकारी के अनुसार सिविल लाइन थाने में पदस्थ एक आरक्षक करीब एक वर्ष पहले रात्रि पेट्रोलिंग ड्यूटी पूरी करने के बाद थाना परिसर स्थित बैरकनुमा कमरे में आराम कर रहा था। आरोप है कि उसी दौरान वहां पहुंचे एक अन्य कांस्टेबल ने उसके पास बीयर की बोतल रखकर वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। यह वीडियो लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं हुआ, लेकिन अब उसी वीडियो के आधार पर दबाव बनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

वायरल ऑडियो में संबंधित आरक्षक और एक कथित मध्यस्थ के बीच बातचीत सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। बातचीत से संकेत मिलता है कि वीडियो पहले एक पत्रकार तक पहुंचा और बाद में दूसरे पत्रकार को भी भेजा गया। इसके बाद समझौते और भुगतान को लेकर दबाव बनाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है।

वीडियो को नया बताकर कार्रवाई कराने की चर्चा

ऑडियो में यह भी सुनाई देने की चर्चा है कि पुराने वीडियो को अधिकारियों के समक्ष नया बताकर प्रस्तुत किया जा सकता है। साथ ही कुछ न्यूज पोर्टलों के माध्यम से वीडियो को प्रसारित कराने की बात भी सामने आई है। बातचीत में संबंधित आरक्षक के प्रस्तावित प्रमोशन का जिक्र भी किया गया है।

ऑडियो के अनुसार वीडियो सार्वजनिक होने पर विभागीय जांच, निलंबन और पदोन्नति प्रभावित होने जैसी आशंकाएं जताई गईं। आरोप है कि इन्हीं संभावित परिणामों का हवाला देकर आरक्षक पर दबाव बनाया गया और उससे रुपये मांगने की कोशिश की गई।

एक लाख रुपये मांगने के आरोप

वायरल ऑडियो में कथित रूप से वसूली और मध्यस्थता की बातें भी सामने आई हैं। चर्चा के अनुसार वीडियो को सार्वजनिक नहीं करने के बदले शुरुआत में एक लाख रुपये की मांग रखी गई थी। रकम को लेकर सहमति नहीं बनने पर वीडियो अलग-अलग लोगों तक पहुंचने की बात कही जा रही है।

ऑडियो में दो पत्रकारों के नामों का उल्लेख होने की भी चर्चा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है। बातचीत में यह भी कहा गया है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वीडियो को व्यापक स्तर पर प्रसारित कराया जा सकता है।

प्रमोशन रोकने का डर दिखाने का आरोप

कथित ऑडियो में संबंधित आरक्षक की प्रस्तावित पदोन्नति को लेकर भी चर्चा सामने आई है। बताया जा रहा है कि उसका नाम आगामी प्रमोशन सूची में शामिल है। आरोप है कि इसी बात को आधार बनाकर उस पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।

बातचीत में विभागीय जांच, निलंबन और प्रमोशन रुकने जैसी संभावित कार्रवाई का जिक्र सुनाई देता है। आरोप यह भी है कि इन परिस्थितियों का हवाला देकर रुपये मांगने का प्रयास किया गया। ऑडियो में समय-समय पर अन्य प्रकार की सेवाएं लेने और संबंध बनाए रखने जैसी चर्चाएं भी सामने आने की बात कही जा रही है।

गुटबाजी की चर्चाएं फिर तेज

इस पूरे घटनाक्रम ने सिविल लाइन थाना स्टाफ के भीतर चल रही आपसी खींचतान और गुटबाजी को भी उजागर कर दिया है। इससे पहले भी थाना स्टाफ से जुड़े वीडियो और ऑडियो वायरल होने के मामले सामने आ चुके हैं।

फिलहाल वायरल ऑडियो और लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि मामला पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला केवल आपसी विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली जैसे गंभीर पहलुओं की जांच भी हो सकती है।

वीडियो पुराना है, इसमें सिपाही सोते हुए दिखाई दे रहा है। इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

-पंकज पटेल, एएसपी सिटी बिलासपुर

Related Articles

Back to top button