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“सीएम के सामने खुली पुलिस की पोल: रातभर थाने में बैठी रही महिला, नहीं लिखी गई रिपोर्ट; मुख्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश”

छेड़छाड़ और मारपीट की शिकायत लेकर पहुंची थी पीड़िता, 15 दिनों तक काटती रही थाने के चक्कर; जन चौपाल में फूटा दर्द

रायपुर/सक्ती(छत्तीसगढ़ उजाला)-सुशासन तिहार के तहत आयोजित जन चौपाल में उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब एक महिला ने मुख्यमंत्री के सामने ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सिरली गांव की रहने वाली पीड़िता ने सक्ती थाना प्रभारी (टीआई) पर उसकी शिकायत को नजरअंदाज करने, पूरी रात थाने में बैठाए रखने और रिपोर्ट दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया। महिला की पीड़ा सुनते ही मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के निर्देश दे दिए।

ठठारी गांव में आयोजित जन चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान सिरली गांव की एक महिला मंच के सामने पहुंची और न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी आपबीती सुनाई।
महिला ने बताया कि उसके साथ छेड़छाड़ और मारपीट की घटना हुई थी। न्याय की उम्मीद में वह 5 जून की रात सक्ती थाने पहुंची, लेकिन वहां उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।

पीड़िता का आरोप है कि थाना प्रभारी और मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसकी बात सुनने के बजाय उसे घंटों थाने में बैठाए रखा। वह रात करीब 3 बजे तक थाने में मौजूद रही, लेकिन उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई और न ही कोई कार्रवाई की गई।

महिला ने मुख्यमंत्री को बताया कि वह पिछले 15 दिनों से लगातार थाने के चक्कर लगा रही है। कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद उसकी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। उसने कहा कि न्याय पाने के लिए उसे बार-बार पुलिस के पास जाना पड़ रहा है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही।

मुख्यमंत्री ने महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंच से ही अधिकारियों को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। महिला की पूरी बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, “ठीक है, दिखवाएंगे”, और संबंधित अधिकारियों से मामले की वस्तुस्थिति की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

जन चौपाल में सामने आए इस मामले के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई। ग्रामीणों ने पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

सुशासन तिहार का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं को सीधे सुनकर उनका समाधान करना है, लेकिन सक्ती से सामने आई यह घटना पुलिस व्यवस्था और शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।

प्रशांत गौतम

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