बिलासपुर

*सर्पदंश मुआवजा घोटालाः मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंची जांच की आंच* *सिम्स के कई डॉक्टर, एडीएम, एसडीएम व तहसीलदार भी जांच के दायरे में 17 करोड़ से अधिक के मुआवजा घोटाले में अब तक 14 आरोपी गिरफ्तार*

छत्तीसगढ़ उजाला

 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। सर्पदंश मुआवजा घोटाले में अब तक जो गिरफ्तारियां हुई हैं, वे सिर्फ मोहरे थे। मास्टरमाइंडों तक अभी तक जांच की आंच नहीं पहुंची है। सिम्स के कई डॉक्टर और कर्मचारी भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। अब तक की पूछताछ में सुई एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों की संलिप्तता की ओर भी घूम रही है, क्योंकि नजरी नक्शा व अन्य राजस्व दस्तावेज तहसील कार्यालय से ही जारी होते हैं। इधर, प्रकरणों की फाइलों की दोबारा गहनता से जांच की जा रही है, जिसमें सील और हस्ताक्षर का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है।

दलालों के संगठित गिरोह ने सामान्य मौतों को बताया सर्पदंश

पुलिस और प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि जिले के अलग-अलग इलाकों में दलालों का एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जो सामान्य मौतों को भी सर्पदंश से हुई फर्जी मौतों के दस्तावेज तैयार करवाकर शासन की मुआवजा राशि हड़प रहा था। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपितों से लगातार पूछताछ की जा रही है, जिससे इस सिंडिकेट के कई नए तार जुड़ते नजर आ रहे हैं।

जांच में सिम्स अस्पताल के कुछ कर्मचारियों और निचले स्तर के राजस्व कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। राजस्व व स्वास्थ्य विभाग के फर्जी सील, दस्तावेज और झूठे पंचनामे तैयार करने के इस खेल में शामिल बड़े चेहरों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा प्रकरणों की फाइलों का दोबारा बारीक परीक्षण किया जा रहा है, ताकि फर्जीवाड़े की पूरी कड़ी को सामने लाया जा सके। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस रैकेट से जुड़े अन्य आरोपितों और मुख्य सूत्रधारों को भी कानून के शिकंजे में लिया जाएगा।

मुख्य मास्टरमाइंड वकील अब भी फरार

सर्पदंश मुआवजा के फर्जीवाड़े का कथित मुख्य मास्टरमाइंड अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की विशेष टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि मुख्य सरगना के पकड़े जाने के बाद घोटाले के कई और चौंकाने वाले राज उजागर होंगे।

सिम्स के डॉक्टरों और कर्मियों की भूमिका की जांच

मुआवजा दावा तैयार करने के लिए सिम्स अस्पताल से फर्जी पोस्टमार्टम और बिसरा रिपोर्ट तैयार कराने की आशंका जताई जा रही है। संदेह के घेरे में सिम्स के फॉरेंसिक विभाग के डॉक्टर नारायण गोले भी हैं, जो वर्तमान में मोबाइल बंद कर गायब हो चुके हैं। जांच टीम सिम्स के संदेही डॉक्टरों व कर्मचारियों से पूछताछ की तैयारी में है।

अब तक यह हुआ

वर्ष 2021 से 2024 के बीच सर्पदंश से हुई 431 मौतों और 17 करोड़ 24 लाख रुपये के मुआवजा आवंटन में हुए बड़े फर्जीवाड़े की जांच जारी है। सिम्स अस्पताल के फर्जी मर्ग नंबर, कूटरचित पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गलत नाम-पते के आधार पर फांसी, हार्ट अटैक या आत्महत्या जैसी मौतों को सर्पदंश बताकर चार-चार लाख रुपये की सरकारी राशि हड़पी गई थी। कलेक्टर बिलासपुर से प्राप्त 17 शिकायतों की जांच के बाद 15 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।

अब तक 14 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। इसमें सिम्स की पूर्व डॉक्टर प्रियंका सोनी, तहसील कार्यालय के तीन बाबू, सिम्स चौकी में तैनात दो नगर सैनिक शामिल हैं।

Related Articles

Back to top button