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रायपुर का ‘हाइपर क्लब’ सवालों के घेरे में:नियम ताक पर, रातभर ‘जाम-जश्न’–लाचार प्रशासन या मिलीभगत का खेल?

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-राजधानी की वीआईपी रोड पर स्थित चर्चित ‘हाइपर क्लब’ इन दिनों गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। शहर के सबसे पॉश इलाके में संचालित इस क्लब पर लगातार नियमों की अनदेखी, देर रात तक चलने वाली नाइट पार्टियों और बढ़ती अव्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों और सूत्रों के मुताबिक, क्लब में आए दिन किसी न किसी बात को लेकर विवाद और हंगामे की स्थिति बनती रहती है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
तय समय के बाद भी चल रही पार्टियां
कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद राजधानी में कानून-व्यवस्था को सख्त बनाने का दावा किया गया था, लेकिन ‘हाइपर क्लब’ की गतिविधियां इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही हैं। आरोप है कि क्लब में देर रात तक नाइट पार्टियां आयोजित की जाती हैं, जो निर्धारित समय सीमा का खुला उल्लंघन है।
महानगरों से बुलाए जाते हैं आयोजक
सूत्रों के अनुसार, क्लब में होने वाले आयोजनों के लिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों से आयोजकों को बुलाया जाता है। इन पार्टियों में भारी भीड़ जुटती है, तेज संगीत और शराब का दौर देर रात तक चलता है, जिससे आसपास के रहवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कानून-व्यवस्था पर भी असर
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्लब के बाहर देर रात गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। कई बार नशे में धुत लोगों के बीच झगड़े और विवाद भी सामने आते हैं, लेकिन पुलिस की सक्रियता अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखती।
IPS अधिकारी के संरक्षण की चर्चा तेज
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात एक आईपीएस अधिकारी की कथित भूमिका को लेकर सामने आ रही है।
सूत्रों का दावा है कि क्लब का संचालन किसी प्रभावशाली आईपीएस अधिकारी के संरक्षण में हो रहा है, जिसके चलते इस पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शहर में इस तरह की चर्चाएं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
अब यह मामला सिर्फ एक क्लब तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या राजधानी में कानून सभी के लिए बराबर है या प्रभावशाली लोगों के लिए अलग नियम लागू होते हैं।

प्रशांत गौतम

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