भारत–दक्षिण अफ्रीका संसदीय संवाद में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बजटीय पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी पर रखा मजबूत पक्ष

नई दिल्ली(छत्तीसगढ़ उजाला)-रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल गुरुवार को संसद की प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) की बैठक में शामिल हुए, जहाँ दक्षिण अफ्रीका की संसद की विनियोग संबंधी स्थायी समिति (SCOA) के प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय संवाद हुआ। बैठक में विधायी निगरानी, बजटीय अनुशासन और वित्तीय पारदर्शिता को सुदृढ़ करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की साझा विरासत पर आधारित हैं, जिनकी जड़ें स्वतंत्रता संग्राम और संवैधानिक मूल्यों में निहित हैं।
बैठक में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के मौजूदा दौर में बजट अनुपालन तथा सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने पर चर्चा हुई। श्री अग्रवाल ने ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी व्यय के वास्तविक प्रभाव (Outcome) को ट्रैक करने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने भारत की टाटा और महिंद्रा जैसी अग्रणी कंपनियों की दक्षिण अफ्रीका में सशक्त उपस्थिति का उल्लेख करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में निवेश की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया।
बैठक में प्रवासी भारतीय समुदाय (डायस्पोरा) की भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। श्री अग्रवाल ने बताया कि 17 लाख से अधिक भारतीय मूल के नागरिक भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों की मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने OCI सुविधाओं को सातवीं पीढ़ी तक विस्तार देने और डायस्पोरा के आर्थिक योगदान को और सशक्त बनाने के लिए बजटीय प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार साझा किया।
भारत की Direct Benefit Transfer (DBT) और पीएम-किसान जैसी योजनाओं की सफलता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने लीकेज को समाप्त कर 100 प्रतिशत लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुँचाया है।
बैठक में दोनों देशों की संसदीय समितियों के बीच डिजिटल बजट ट्रैकिंग और रियल-टाइम निगरानी के लिए एक संरचित विनिमय कार्यक्रम शुरू करने पर सहमति बनी। साथ ही G20, BRICS और IBSA मंचों के माध्यम से वैश्विक वित्तीय संरचनाओं में सुधार तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्राप्ति हेतु संयुक्त कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
दक्षिण अफ्रीका में भारत के UPI और आधार जैसे डिजिटल ढाँचों को अपनाने के लिए विधायी सहयोग पर भी विचार किया गया। इसके तहत ‘आउटपुट’ के बजाय ‘आउटकम (परिणाम)’ आधारित शासन को बढ़ावा देने हेतु संयुक्त तकनीकी कार्यशालाओं के आयोजन का प्रस्ताव रखा गया।
अंत में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा,
“भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच यह संसदीय संवाद केवल अनुभव साझा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह लोकतंत्र की नींव है। डिजिटल क्रांति और बजटीय पारदर्शिता के माध्यम से हम अंतिम व्यक्ति तक न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”




