छत्तीसगढ़ में रहस्यमयी बीमारी का साया: एक हफ्ते में कई बार बेहोश हुईं तीसरी कक्षा की छात्राएं, प्रशासन और डॉक्टर भी हैरान

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई(छत्तीसगढ़ उजाला)
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले से एक चौंकाने वाला और रहस्यमयी मामला सामने आया है। सड़क अतरिया क्षेत्र के खैरबना प्राथमिक शाला में पढ़ने वाली तीसरी कक्षा की छात्राएं बीते एक सप्ताह से अचानक बेहोश हो रही हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से इनकार कर दिया है, वहीं स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अभी तक इस घटना की ठोस वजह नहीं ढूंढ पाया है।
प्रार्थना के बाद अचानक गिरीं बच्चियां, मच गया हड़कंप
बुधवार सुबह रोज की तरह स्कूल में प्रार्थना सभा हुई। प्रार्थना के बाद जैसे ही बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में पहुंचे, तभी तीसरी कक्षा की तीन छात्राएं अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। शिक्षक उन्हें संभाल ही रहे थे कि कुछ ही मिनटों में 4–5 अन्य छात्राएं भी बेसुध हो गईं।घटना से स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों में डर का माहौल बन गया।
कुछ देर बाद खुद आ जाता है होश, फिर दिखती हैं सामान्य
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बेहोश हुई बच्चियां कुछ समय बाद खुद ही होश में आ जाती हैं और फिर सामान्य व्यवहार करने लगती हैं।
यह सिलसिला पिछले एक हफ्ते से जारी है—
कभी प्रार्थना के दौरान तो कभी कक्षा में पढ़ाई के समय लगातार हो रही इन घटनाओं ने इसे एक मेडिकल मिस्ट्री बना दिया है।
डॉक्टरों की जांच में सब नॉर्मल, फिर वजह क्या?
मामले की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्कूल में मेडिकल कैंप लगाया गया।
जांच में किया गया:
ब्लड प्रेशर जांच
शुगर टेस्ट
हीमोग्लोबिन लेवल
ब्लड सैंपल कलेक्शन
नतीजा:
प्रारंभिक जांच में सभी रिपोर्ट सामान्य पाई गईं। किसी भी छात्रा में कोई स्पष्ट बीमारी या विषाक्तता के लक्षण नहीं मिले।
CMHO डॉ. आशीष शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल बोर्ड से विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। बेहोश हुई छात्राओं को एम्बुलेंस से सिविल अस्पताल खैरागढ़ भेजा गया है, जहां उनकी गहन जांच जारी है।
कलेक्टर मौके पर पहुंचे, स्कूल के हर कोने की जांच
घटना के बढ़ते असर को देखते हुए जिले के कलेक्टर इंद्रजीत चंद्रवाल और जिला पंचायत CEO प्रेम पटेल स्वयं स्कूल पहुंचे।
अधिकारियों ने—मिड-डे मील रसोई,पीने के पानी,स्कूल परिसर,आसपास के वातावरण की बारीकी से जांच की। कलेक्टर ने डरे हुए बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया।
अभिभावकों का साफ संदेश: वजह पता चले बिना स्कूल नहीं
घटना से गांव में भय का माहौल है। अभिभावकों का कहना है
> “जब तक इस रहस्यमयी बीमारी की असली वजह सामने नहीं आती और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक हम उन्हें स्कूल नहीं भेजेंगे।”
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर टिकी हैं सभी की नजरें
फिलहाल पूरे मामले से पर्दा मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट के बाद ही उठ पाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।




