राजेश चटर्जी की मांग: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए जल्द आयोजित करे TET परीक्षा राज्य सरकार
आलोक शुक्ला बोले— लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य को लेकर बनी चिंता दूर करे सरकार, समयबद्ध TET परीक्षा कराए और आवश्यक तैयारी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप जल्द से जल्द शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित कराने की मांग की है। फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी एवं प्रदेश संगठन सचिव तथा रायपुर संभाग प्रभारी आलोक शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार समयबद्ध तरीके से TET परीक्षा आयोजित कर लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य को लेकर बनी चिंता का समाधान करे।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका (सिविल) क्रमांक 1385/2025 में 29 मई 2026 को पारित आदेश के पैरा-34 में स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी राज्य सरकारों के सक्षम प्राधिकारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का नियमित आयोजन करें। न्यायालय ने कहा है कि यह परीक्षा अधिमानतः वर्ष में दो बार, छह-छह माह के अंतराल पर आयोजित की जानी चाहिए, ताकि पात्र शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सके।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET उत्तीर्ण करने का अवसर दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस समय-सीमा के बाद किसी प्रकार के समय-विस्तार की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
फेडरेशन ने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्णय में कहा गया है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम शेष है, वे अपनी सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रहेंगे, लेकिन पदोन्नति के लिए पात्र नहीं होंगे। वहीं, जो कार्यरत शिक्षक पदोन्नति के इच्छुक हैं और TET उत्तीर्ण नहीं हैं, उनकी पदोन्नति पर विचार नहीं किया जाएगा।
पदाधिकारियों ने बताया कि भारत में TET परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर CTET का आयोजन किया जाता है, जबकि राज्य स्तर पर संबंधित राज्य परीक्षा एजेंसियां परीक्षा आयोजित करती हैं। छत्तीसगढ़ में यह जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (CG Vyapam) की है।
फेडरेशन का कहना है कि NCTE की 11 फरवरी 2011 की अधिसूचना में TET संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जबकि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य नहीं था। छत्तीसगढ़ में पहली बार TET परीक्षा वर्ष 2011 के बाद आयोजित हुई थी। उस समय न तो भर्ती नियमों में TET की अनिवार्यता का उल्लेख था और न ही नियुक्ति आदेशों में इसका प्रावधान था।
फेडरेशन ने सवाल उठाया कि यदि राज्य सरकार समय पर TET परीक्षा आयोजित ही नहीं करेगी, तो कार्यरत शिक्षक निर्धारित समय-सीमा के भीतर परीक्षा कैसे उत्तीर्ण कर पाएंगे।
फेडरेशन ने मांग की है कि उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में कार्यरत शिक्षकों के लिए विभागीय TET परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक योग्यता प्राप्त कर सकें और केवल अवसरों के अभाव में किसी शिक्षक का भविष्य प्रभावित न हो।
राजेश चटर्जी और आलोक शुक्ला ने कहा कि TET परीक्षा केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान, आजीविका और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान देने वाले शिक्षकों को सेवाकाल के अंतिम चरण में केवल परीक्षा आयोजित नहीं होने के कारण सेवा से वंचित करना न्यायसंगत नहीं होगा।
फेडरेशन ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव तथा व्यापम सचिव से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए जल्द से जल्द विभागीय TET परीक्षा की तिथि घोषित की जाए। साथ ही प्रभावित शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण, अध्ययन सामग्री और परीक्षा की तैयारी हेतु आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं, ताकि सभी शिक्षक निर्धारित समय-सीमा के भीतर TET उत्तीर्ण कर सकें।



