छत्तीसगढ़ MMS कांड: विधायक देवेंद्र यादव ने दिया सैंपल, अब फॉरेंसिक जांच से खुलेगा राज

भिलाई(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ के चर्चित MMS कांड में अहम मोड़ आ गया है। भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक Devendra Yadav शनिवार को भिलाई नगर थाना पहुंचे और पुलिस को अपना फोटो व वीडियो सैंपल सौंपा।
पुलिस ने सैंपल को आधिकारिक रिकॉर्ड में सुरक्षित रखते हुए अब इसे तकनीकी (फॉरेंसिक) जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वायरल वीडियो असली है या मॉर्फ्ड।
नोटिस के बाद पहुंचे थाने
जानकारी के अनुसार, पुलिस द्वारा विधायक को पहले भी कई बार नोटिस भेजे गए थे। हाल ही में 6 अप्रैल को जारी नोटिस के बाद वे शनिवार को थाने पहुंचे।
थाना प्रभारी Jitendra Verma की मौजूदगी में फोटो और वीडियो सैंपलिंग की गई। पूरी प्रक्रिया को पुलिस ने रिकॉर्ड में दर्ज किया।
“FIR हमने कराई, फिर भी जांच अधूरी”
मीडिया से बातचीत में विधायक देवेंद्र यादव ने कहा—
“करीब 3 साल पहले एक कथित वीडियो वायरल हुआ था, जिससे लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। उसी समय हमने FIR दर्ज कराई थी, लेकिन आज तक जांच पूरी नहीं हुई।”
उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने पर वे सहयोग के लिए थाने पहुंचे हैं।
विधायक ने नोटिस की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है—
नोटिस में सुबह 11 बजे थाने पहुंचने का समय दिया गया
लेकिन नोटिस उसी दिन दोपहर 1 बजे उनके पास पहुंचा
उन्होंने इसे जल्दबाजी और प्रक्रिया में कमी बताया।
देवेंद्र यादव ने कहा—“नोटिस-नोटिस खेलना बंद करें”
“जब FIR हमने खुद करवाई है, तो नोटिस-नोटिस खेलने की जरूरत नहीं है। हम चाहते हैं कि मामले की पूरी और निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आए।”
उन्होंने यह भी कहा कि वे हर तरह की जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
चुनाव के दौरान वायरल हुआ था वीडियो
विधायक के अनुसार, यह मामला करीब 3 साल पुराना है, जब विधानसभा चुनाव के दौरान एक कथित MMS वायरल हुआ था।
वीडियो में एक युवक को महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था, जिसे लेकर कुछ लोगों ने दावा किया कि वह व्यक्ति देवेंद्र यादव हैं।
हालांकि, विधायक ने उस समय ही इसे मॉर्फ्ड बताते हुए भिलाई नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी और जांच की मांग की थी।
क्या है पूरा MMS कांड?
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान यह MMS कई सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप्स में तेजी से वायरल हुआ था।
इस वीडियो को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी हुए और इसे चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा गया।
अब पुलिस द्वारा लिए गए सैंपल की फॉरेंसिक जांच होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा—वीडियो असली है या फर्जी,क्या इसमें किसी तरह की एडिटिंग या मॉर्फिंग की गई है




