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18 साल के जमीनी अनुभव को मिला सम्मान: अब स्वास्थ्य संचालनालय में दिखेगी RMA की भूमिका, ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्षों से दूरस्थ, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले रूरल मेडिकल असिस्टेंट (RMA) संवर्ग के अनुभवी चिकित्सकों को अब स्वास्थ्य संचालनालय में जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस फैसले को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

वर्ष 2007-08 से PMHM (त्रिवर्षीय चिकित्सा पाठ्यक्रम) उत्तीर्ण एवं पंजीकृत RMA चिकित्सकों की नियुक्ति प्रदेश के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में की गई थी। उस समय कई ऐसे स्वास्थ्य केंद्र थे, जहां वर्षों तक नियमित चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो सकी। ऐसे कठिन हालात में RMA चिकित्सकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभालते हुए लाखों ग्रामीणों को उपचार उपलब्ध कराया।

जमीनी अनुभव अब नीति निर्माण में बनेगा ताकत

करीब 18 वर्षों तक ग्रामीण अंचलों में कार्य करने वाले RMA चिकित्सकों के पास स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों, संसाधनों की कमी, जनजातीय क्षेत्रों की जरूरतों और स्वास्थ्य योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन का व्यापक अनुभव है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह अनुभव अब प्रशासनिक स्तर पर भी राज्य के लिए उपयोगी साबित होगा।

इसी सोच के तहत डॉ. राज सिंह मंडावी, डॉ. अरविंद भारती और डॉ. मनीष कुमार साहू की पदस्थापना स्वास्थ्य संचालनालय में की गई है। इनकी नियुक्ति से अब स्वास्थ्य योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में जमीनी अनुभव का सीधा लाभ मिलेगा।

ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप बनेंगी योजनाएं

संचालनालय में कार्यरत RMA चिकित्सक अपने लंबे फील्ड अनुभव के आधार पर स्वास्थ्य नीतियों और योजनाओं को अधिक व्यावहारिक और ग्रामीण आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में योगदान देंगे। इससे दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

RMA संघ ने राज्य सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम अनुभव और प्रशासन के बेहतर समन्वय का उदाहरण है। संघ का कहना है कि अब नीति निर्माण में उन लोगों की भी भागीदारी होगी, जिन्होंने वर्षों तक गांवों में रहकर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक चुनौतियों का सामना किया है।

स्वास्थ्य विभाग का यह निर्णय इस बात का संकेत है कि अब जमीनी अनुभव को भी नीति निर्माण में उचित महत्व दिया जा रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक सशक्त, संवेदनशील एवं जनहितैषी बन सकेगा

प्रशांत गौतम

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