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“रायपुर में सरकार, फैसला दिल्ली में! फेरबदल की आहट से बढ़ी सियासी धड़कनें”

बात बेबाक

ऑपरेशन दिल्ली दरबार : कुर्सी बचाओ, कद बढ़ाओ

चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार)

रायपुर/कवर्धा। छत्तीसगढ़ की सियासत इन दिनों दिल्ली और रायपुर के बीच झूलती नजर आ रही है। भाजपा सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री की अचानक बुलाई गई मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद से अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है।

बैठक के बाद मंत्रियों के बदले हुए हावभाव, दिल्ली की लगातार बढ़ती राजनीतिक आवाजाही और पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि सत्ता और संगठन स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों की तैयारी चल रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई कुछ भी कहने को तैयार नहीं है, लेकिन राजनीतिक सूत्र लगातार बड़े बदलावों की संभावना जता रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इस बार आमतौर पर हर राजनीतिक गतिविधि की भनक रखने वाले सूत्र भी असमंजस में दिखाई दे रहे हैं। भाजपा की राजनीति पर नजर रखने वाले वरिष्ठ जानकारों का भी कहना है कि “कुछ बड़ा होने वाला है”, लेकिन वह क्या होगा, इसे लेकर किसी के पास स्पष्ट जवाब नहीं है।

राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों की दिल्ली यात्राओं ने इन अटकलों को और बल दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी चुनौतियों और संगठनात्मक संतुलन को देखते हुए पार्टी नेतृत्व सरकार में कुछ नए चेहरे शामिल कर सकता है, जबकि कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

दिल्ली दरबार में नेताओं की बढ़ती मौजूदगी को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई पांच मंत्रियों के बदलने की बात कर रहा है तो कोई सात नामों की सूची तैयार होने का दावा कर रहा है। वहीं कुछ लोग इसे सरकार की कार्यशैली में सुधार और प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन से जोड़कर देख रहे हैं।

सबसे ज्यादा चर्चाएं एक महिला मंत्री के संभावित विकल्प को लेकर हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि उनकी जगह प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही भावना बोहरा को मंत्रिमंडल में अवसर मिल सकता है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन केवल इस संभावना ने ही कई नेताओं की राजनीतिक धड़कनें बढ़ा दी हैं।

इधर सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की वरिष्ठ नेताओं केदार कश्यप और तोखन साहू के साथ वायरल हो रही तस्वीरों को भी कई राजनीतिक मायने दिए जा रहे हैं। समर्थक और विरोधी दोनों अपने-अपने हिसाब से इन तस्वीरों का विश्लेषण कर रहे हैं।

वर्तमान हालात ऐसे हैं कि जो मंत्री हैं वे अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं, जो मंत्री नहीं हैं वे मंत्रिमंडल में जगह बनाने के लिए सक्रिय हैं और जो किसी दौड़ में दिखाई नहीं देते, वे भी राजनीतिक समीकरणों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। कई विधायकों की नजर इन दिनों अपने मोबाइल फोन पर टिकी हुई है। हर कॉल और हर संदेश के साथ उम्मीदें और आशंकाएं दोनों बढ़ रही हैं।

उधर जनता भी पूरे घटनाक्रम का आनंद ले रही है। चाय की दुकानों, चौक-चौराहों और सोशल मीडिया समूहों में हर दिन नया मंत्रिमंडल बन रहा है और हर शाम नया समीकरण सामने आ रहा है। राजनीतिक अफवाहें इस समय लोकतंत्र की सबसे तेज गति से चलने वाली व्यवस्था साबित हो रही हैं।

फिलहाल स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में हर कोई दूसरे की कुर्सी का आकलन कर रहा है और अपनी कुर्सी मजबूती से थामे हुए है। दिल्ली की ओर उठती निगाहें और नेताओं की बढ़ती बेचैनी यही संकेत दे रही हैं कि अंतिम फैसला रायपुर से ज्यादा दिल्ली में तय होगा।

अब देखना यह है कि संभावित राजनीतिक ऑपरेशन के बाद केवल विभागों में बदलाव होता है, कुछ नए चेहरे सामने आते हैं या फिर नेतृत्व फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का फैसला करता है। तब तक सियासत के गलियारों में एक ही वाक्य सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है—”कुछ बड़ा होने वाला है।”

और अंत में…

वाकिफ़ हूँ बखूबी इस दुनिया की फ़ितरत से,

बहुत चाहते हैं लोग, मगर ज़रूरत की तरह।

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प्रशांत गौतम

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