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नवजात के कटे होंठ-तालु का बिना सर्जरी से पहले सफल उपचार, PNAM तकनीक ने बदली चेहरे की बनावट

रायपुर शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय में विशेषज्ञों की बड़ी सफलता, प्री-सर्जिकल नेज़ो एल्विओलर मोल्डिंग से होंठ, नाक और मसूड़ों की संरचना में आया उल्लेखनीय सुधार

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, रायपुर के पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री विभाग में एक नवजात शिशु के Unilateral Cleft Lip and Palate (एक तरफ से कटे होंठ एवं तालु) का प्री-सर्जिकल नेज़ो एल्विओलर मोल्डिंग (PNAM) तकनीक से सफलतापूर्वक उपचार किया गया है। विशेषज्ञों की टीम द्वारा किए गए इस उपचार में सर्जरी से पहले ही शिशु के होंठ, नाक और मसूड़ों की बनावट में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

इस उपचार को पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री विभाग की डॉ. अंजली सिंह एवं विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया। PNAM जैसी आधुनिक और नॉन-सर्जिकल तकनीक के माध्यम से शिशु के चेहरे की संरचना को सर्जरी के लिए अधिक अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

जन्मजात समस्या के कारण दूध पीने में होती है परेशानी

कुछ नवजात शिशुओं में जन्म के दौरान होंठ और तालु का विकास पूरी तरह सामान्य रूप से नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति को Cleft Lip and Palate यानी कटे होंठ एवं तालु कहा जाता है। इस स्थिति में होंठ और मसूड़ों के बीच अंतर होने के साथ-साथ नाक और ऊपरी जबड़े की संरचना में भी असमानता दिखाई दे सकती है।

इस समस्या का असर केवल चेहरे की बनावट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई बच्चों को जन्म के बाद दूध पीने और भोजन लेने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। नाक और ऊपरी जबड़े की संरचना प्रभावित होने के कारण आगे चलकर उपचार और सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

उपचार के लिए शासकीय दंत महाविद्यालय पहुंचे माता-पिता

इसी तरह की जन्मजात समस्या के साथ एक नवजात शिशु को उसके माता-पिता उपचार के लिए शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, रायपुर लेकर पहुंचे। विशेषज्ञों ने शिशु की विस्तृत जांच और स्थिति का आकलन करने के बाद सर्जरी से पहले Pre-Surgical Nasoalveolar Molding (PNAM) पद्धति से उपचार करने का निर्णय लिया।

क्या है PNAM तकनीक?

प्री-सर्जिकल नेज़ो एल्विओलर मोल्डिंग (PNAM) एक नॉन-सर्जिकल ऑर्थोपेडिक उपचार पद्धति है। इसमें शिशु के मुंह के अंदर विशेष रूप से तैयार की गई एक मोल्डिंग प्लेट लगाई जाती है। यह प्लेट धीरे-धीरे कटे हुए और विकृत मसूड़ों तथा जबड़े के हिस्सों को उचित दिशा और स्थिति में लाने में मदद करती है।

इस तकनीक में केवल मसूड़ों और जबड़े की संरचना पर ही काम नहीं किया जाता, बल्कि आवश्यकता के अनुसार नाक के आकार और नासिका के आधार को भी आकार देने में मदद की जाती है। इसका उद्देश्य सर्जरी से पहले ही चेहरे की संरचना को यथासंभव संतुलित करना और भविष्य की सर्जरी के लिए बेहतर स्थिति तैयार करना होता है।

नियमित समायोजन से धीरे-धीरे आया सुधार

उपचार के दौरान शिशु को लगाई गई मोल्डिंग प्लेट को नियमित अंतराल पर विशेषज्ञों द्वारा समायोजित किया गया। समय के साथ कटे हुए मसूड़ों और जबड़े के हिस्सों की स्थिति में सुधार हुआ।

इसके साथ ही होंठ के दोनों हिस्सों के बीच का अंतर भी धीरे-धीरे कम हुआ। नाक की बनावट और नासिका के आधार में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। उपचार के बाद शिशु के चेहरे की संरचना पहले की तुलना में अधिक संतुलित दिखाई देने लगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, PNAM का प्रमुख उद्देश्य सर्जरी का विकल्प बनना नहीं, बल्कि सर्जरी से पहले शिशु के होंठ, नाक और मसूड़ों की संरचना को बेहतर स्थिति में लाना है, ताकि आगे होने वाली सर्जिकल प्रक्रिया के लिए परिस्थितियां अधिक अनुकूल हो सकें।

माता-पिता ने जताई खुशी

उपचार के बाद शिशु के चेहरे की बनावट में आए सकारात्मक बदलाव को देखकर माता-पिता ने प्रसन्नता व्यक्त की। शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में उपलब्ध इस तरह की आधुनिक उपचार पद्धति से जन्मजात कटे होंठ एवं तालु की समस्या से जूझ रहे बच्चों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कटे होंठ एवं तालु वाले बच्चों में समय पर जांच और उपचार शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक अवस्था में उचित उपचार मिलने से चेहरे की संरचना को बेहतर तरीके से विकसित करने और भविष्य की सर्जरी के लिए बेहतर आधार तैयार करने में मदद मिल सकती है।

शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, रायपुर में विशेषज्ञों द्वारा किए गए इस सफल उपचार से यह भी सामने आया है कि आधुनिक दंत एवं मैक्सिलोफेशियल उपचार तकनीकों के माध्यम से नवजात शिशुओं में जन्मजात चेहरे की विकृतियों के प्रबंधन को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

प्रशांत गौतम

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