मरवाही CHC में मनमानी का आरोप! ड्यूटी से गायब कर्मचारी, रजिस्टर में हाजिरी और वेतन जारी? मृत्युंजय सराफ की पदस्थापना पर भी सवाल, CMHO की निगरानी कटघरे में
स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय की कथित गैरहाजिरी के बावजूद उपस्थिति दर्ज होने का आरोप, अटैचमेंट खत्म होने के बाद भी मृत्युंजय सराफ के मरवाही में बने रहने का दावा; पूरे मामले में CMHO की भूमिका और निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मरवाही की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। कर्मचारियों की उपस्थिति और वेतन भुगतान से लेकर डॉक्टरों की उपलब्धता, अस्पताल की साफ-सफाई और अटैचमेंट व्यवस्था तक कई सवाल उठ रहे हैं। इन शिकायतों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल जिला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और CMHO की जवाबदेही को लेकर खड़ा हो गया है।
ड्यूटी से गायब, फिर भी रजिस्टर में हाजिरी का आरोप
स्थानीय स्तर पर मिली शिकायत के अनुसार CHC मरवाही में एक स्टाफ नर्स के कई दिनों तक ड्यूटी पर नहीं आने के बावजूद उपस्थिति पंजी में लगातार हस्ताक्षर दर्ज होने का आरोप है। इसी तरह एक वार्ड बॉय के संबंध में भी शिकायत है कि वे कई दिनों से ड्यूटी पर अनुपस्थित रहे, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर में उनकी हाजिरी दर्ज होती रही।
शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि इन कर्मचारियों का वेतन भुगतान भी जारी रहा। ऐसे में सवाल है कि जब कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे तो उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई और वेतन भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर स्वीकृत हुई?
CMHO के निर्देश पर वेतन तैयार होने की बात ने बढ़ाया विवाद
कर्मचारियों की अनुपस्थिति और वेतन भुगतान को लेकर पूछे जाने पर कथित तौर पर यह कहा गया कि वेतन CMHO के निर्देश पर तैयार किया जा रहा है।
यदि ऐसा कोई निर्देश दिया गया है, तो उसके आधार और नियमों की जांच जरूरी है। वहीं यदि कर्मचारी वास्तव में अनुपस्थित थे, तो उनकी उपस्थिति दर्ज करने और वेतन भुगतान की जिम्मेदारी तय होना भी आवश्यक है।
यही वजह है कि पूरे मामले में अब सवाल सीधे CMHO कार्यालय की निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण पर उठ रहे हैं।
मृत्युंजय सराफ की पदस्थापना पर भी गंभीर सवाल
मामले का एक और अहम पहलू मृत्युंजय सराफ की पदस्थापना को लेकर सामने आया है। आरोप है कि शासन द्वारा अटैचमेंट समाप्त करने के निर्देश जारी किए जाने के बावजूद मृत्युंजय सराफ अब भी अटैचमेंट के आधार पर मरवाही में कार्यरत हैं।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वे सप्ताह में केवल एक दिन मरवाही आते हैं, जबकि बाकी दिनों में बिलासपुर में रहते हैं और पूरे महीने का वेतन प्राप्त करते हैं।
इस संबंध में पूछे जाने पर कथित तौर पर यह जवाब दिया गया कि उनकी कुछ परेशानियां हैं और इस संबंध में CMHO को भी जानकारी है।
यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि अटैचमेंट समाप्त करने के शासन के निर्देश के बावजूद मृत्युंजय सराफ किस आदेश या अनुमति के आधार पर मरवाही में कार्यरत हैं? क्या उन्हें विशेष अनुमति मिली है? यदि हां, तो उसका लिखित आदेश क्या है?
CMHO को जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं?
मृत्युंजय सराफ के मामले में यदि CMHO को उनकी कथित अनुपस्थिति, अटैचमेंट और कार्यप्रणाली की जानकारी थी, तो सवाल यह है कि इस संबंध में अब तक क्या कार्रवाई की गई?
क्या उनकी उपस्थिति का सत्यापन कराया गया?
क्या अटैचमेंट संबंधी आदेश की जांच की गई?
क्या उनके वेतन भुगतान का रिकॉर्ड देखा गया?
और यदि शासन के आदेशों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी किसकी तय की गई?
BMO की OPD व्यवस्था भी सवालों में
स्थानीय लोगों का आरोप है कि CHC मरवाही के प्रभारी अधिकारी पिछले लंबे समय से नियमित रूप से OPD में मरीजों को नहीं देखते। जबकि पेंड्रा और गौरेला के स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ OPD संचालन की व्यवस्था होने की बात कही जा रही है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मरवाही CHC की OPD व्यवस्था और अधिकारियों की उपस्थिति की निगरानी आखिर कौन कर रहा है?
डॉक्टरों की उपलब्धता और साफ-सफाई पर भी शिकायत
अस्पताल में साफ-सफाई और डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर भी स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई बार मरीजों को समय पर चिकित्सकीय सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती।
कुछ समय पहले डॉक्टर की अनुपलब्धता के बीच एक मरीज की मौत होने की बात भी स्थानीय स्तर पर सामने आई थी। हालांकि इस घटना और मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि तथा जांच की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
फिर भी इन शिकायतों ने CHC मरवाही की स्वास्थ्य व्यवस्था और जिला स्तर पर इसकी निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मरवाही CHC से जुड़ी शिकायतें अब केवल कर्मचारियों की उपस्थिति तक सीमित नहीं हैं। इसमें वेतन भुगतान, उपस्थिति रजिस्टर, अटैचमेंट व्यवस्था, मृत्युंजय सराफ की कथित पदस्थापना, OPD संचालन, डॉक्टरों की उपलब्धता और अस्पताल प्रबंधन जैसे कई गंभीर मुद्दे शामिल हैं।
अब सवाल सीधे CMHO कार्यालय से हैं—
ड्यूटी से अनुपस्थित कर्मचारियों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज हुई?
बिना ड्यूटी के वेतन भुगतान हुआ तो जिम्मेदार कौन है?
मृत्युंजय सराफ अटैचमेंट खत्म होने के बाद भी किस आदेश के तहत मरवाही में कार्यरत हैं?
यदि CMHO को उनकी स्थिति की जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
CHC की OPD और कर्मचारियों की उपस्थिति की नियमित निगरानी कौन करता है?
अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
इन सभी सवालों पर अब CMHO और जिला स्वास्थ्य प्रशासन के आधिकारिक जवाब का इंतजार है। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप गलत हैं तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए।
नोट: यह खबर स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।



