मरवाही वनमंडल में 14.77 लाख के कथित गोबर घोटाले पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं? तत्कालीन DFO रौनक गोयल और कैंपा प्रभारी भूपेंद्र साहू पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)
मरवाही वनमंडल में गोबर खरीदी के नाम पर सामने आए लगभग 14 लाख 77 हजार 600 रुपये के कथित वित्तीय घोटाले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों और शिकायतों के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मामले में शिकायतकर्ता ने तत्कालीन DFO रौनक गोयल, कैंपा शाखा प्रभारी भूपेंद्र साहू सहित अन्य संबंधित लोगों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, कूटरचित हस्ताक्षर करने और शासकीय राशि के कथित गबन का आरोप लगाया है। इसके बावजूद संबंधित कर्मचारियों का अब तक महत्वपूर्ण शाखाओं में बने रहना कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक FIR या विभागीय कार्रवाई नहीं होने से “संरक्षण” और “सेटिंग” जैसे सवाल भी उठने लगे हैं।
शिकायत के अनुसार गोबर खरीदी के नाम पर फर्जी प्रमाणक और दस्तावेज तैयार कर 14,77,600 रुपये की नगद आहरण अनुमति जारी की गई। जबकि शासन के वित्तीय नियमों के तहत 5 हजार रुपये से अधिक का नगद भुगतान सामान्यतः अनुमन्य नहीं होता।
आरोप है कि कागजों में प्रक्रिया पूरी दिखाकर राशि निकाल ली गई, जबकि वास्तविक खरीदी और भुगतान को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि पिपरिया वन प्रबंधन समिति में वन चौकीदार सुरेश राठौर को कथित रूप से नियमों के विरुद्ध सचिव बना दिया गया। जबकि वन चौकीदार को किसी प्रकार के वित्तीय अधिकार प्राप्त नहीं होते।
इसके बावजूद उनके नाम से दस्तावेज तैयार कर नगद आहरण की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसे नियमों की खुली अनदेखी बताया जा रहा है।
शिकायत में कहा गया है कि पिपरिया और चूहा बहरा वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से राशि आहरित की गई तथा प्रस्ताव पारित करने के दौरान समिति अध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षर तक किए गए।
शिकायतकर्ता का दावा है कि निकाली गई राशि कैंपा शाखा प्रभारी भूपेंद्र साहू के माध्यम से तत्कालीन DFO रौनक गोयल तक पहुंचाई गई। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला कूटरचना, धोखाधड़ी और शासकीय धन के दुरुपयोग की गंभीर श्रेणी में आ सकता है।
शिकायतकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत निम्नलिखित लोगों पर FIR दर्ज करने की मांग की है—
तत्कालीन DFO रौनक गोयल
भूपेंद्र साहू, कैंपा शाखा प्रभारी
सुरेश राठौर, वन चौकीदार व कथित सचिव
श्रीकांत परिहार, सचिव, वन प्रबंधन समिति चूहा बहरा
फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने गंभीर आरोपों और शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? लगातार कार्रवाई टलना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। क्या दागी कर्मचारियों को किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है, या फिर अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है?




