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*युद्ध विराम से पाषाण युग तक ट्रम्प के बदलते बयानों के मायने*

छत्तीसगढ़ उजाला - प्रतीक सोनी

 

उजाला डेस्क – अब जबकि ईरान-इजरायल युद्ध ने अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद एक माह पूर्ण कर लिया है। ट्रम्प के बयानों में आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिल रहे है। ईरान को पाषाण युग में पहुंचा दिए जाने संबंधी बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के द्वारा देश की जनता को सम्बोधित करते हुए दिया गया बिल्कुल नया और आश्चर्यचकित कर देने वाला बयान है। इससे पूर्व उनके द्वारा युद्ध विराम की बात कही जा रही थी। ट्रम्प का बार-बार अपने बयानों से पलटना उनके अस्थिरप्रज्ञ होने की स्थिति को दर्शाता है। अस्थिरप्रज्ञ मतलब मन का स्थिर न होना। इजरायल ईरानी युद्ध में अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों से उनकी मानसिक स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। युद्ध ही क्यों अपने दूसरे कार्यकाल के आरम्भ से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हर दिन अपने बदलते बयानों के लिए चर्चा में रहे है। विश्व के ताकतवर देशों में शुमार अमेरिका के राष्ट्रपति के पद पर पदस्थ विश्व के सर्वोच्च नेता की अस्थिर प्रज्ञता सिर्फ अमेरिकी जनता के लिए ही नही पूरी दुनिया के लिए सोचने समझने और विचार करने की बात है। अमेरिकी राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल के बाद से उनकी मानसिक स्थिति को लेकर प्रश्न खडे किये जा रहे है। ट्रम्प का टैरिफ़ हो या भारत की पाकिस्तान के विरुद्ध की गयी कार्यवाही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सुबह के दिए बयान से शाम को बदल जाने की आदत को दुनियाँ ने देखा। अब भारत में साधारण आदमी भी ट्रम्प के बदलते बयानों को लेकर उन्हें पलटूराम की संज्ञा से नवाजने लगा है।

अब सवाल यह है की ट्रम्प की इस मानसिक स्थिति का खामियाजा कहीं सारी दुनिया को तो नहीं उठाना पड़ रहा है? क्या ईरान को पाषाण युग में पहुंचाना इतना सरल है, जितना ट्रम्प सोच रहे है ? पाषाण युग की कल्पना अमेरिकी राष्ट्रपति के अंदर चल रही विध्वंसकारी सोच का बाहर आना है। यह सोच विश्व शांति की कल्पना के खिलाफ है। इस विध्वंसकारी सोच को साकार करना मतलब दुनिया में प्रलय को आंमत्रित करना है। अभी एक महिना चले युद्ध के असर ने दुनियाँ के देशों में हाहाकार और आवश्यक वस्तुओं का संकट पैदा कर दिया है। विश्व के देश शांति की मंगलकामना कर रहे है। किंतु ट्रम्प अमेरिकी नागरिकों को दिए अपने संदेश में ईरान को पाषाण युग में पहुंचाने की बात कर रहे है। इजरायल ईरान के चल रहे युद्ध में अमेरिकी हस्तक्षेप को दुनियाँ ने अनुचित बताया है। जब युद्ध शुरू होता है तो उस पर किसी का नियत्रण नहीं रहता है। यह बात रूस युक्रेन के युद्ध पर भी समान रूप से लागु होती है। जहां पुतिन की सोच के वितरित युद्ध लम्बा चला जिसमे रुसी ताकत को कमतर आकने पर मजबूर किया है। यही हाल ट्रम्प का हो रहा है। ट्रम्प सोच रहे थै, की उनके एक इशारे पर युद्ध शुरू होगा और दूसरे इशारे पर युद्ध विराम हो जाएगा। किंतु एक माह के युद्ध ने अमेरिकी राष्ट्रपति की छवि को धूमिल कर दिया है। युद्ध के एक सप्ताह बाद से ही युद्ध विराम का एक तरफा राग अलापने वाले ट्रम्प अब ईरान को अमेरिकी शर्तो पर युद्ध विराम नहीं करने पर पाषाण युग में पहुंचा देने की धमकी दे रहे है। उन्होंने उक्त बयान 2 अप्रेल 26 के अपने सम्बोधन में दिया है।

ट्रम्प की ईरान को पाषाण युग में पहुंचा देने की धमकी मानव सभ्यता के लिए विचारणीय प्रश्न है। परमाणु युग से पत्थर के युग में पहुंचाने का विचार एक अंहकारी और सनकी शासक की खीज के आलावा कुछ नही है। किंतु इस बयान के बाद पाषाण सभ्यता पर सरसरी निगाह दौड़ाई तो जाना की पाषाण सभ्यता प्रागैतिहासिक काल का वह आरम्भिक दौर है, जब मानव मुख्य रूप से पत्थर के औजारों का उपयोग करता था। यह युग लगभग 25-26 लाख वर्ष पूर्व से लेकर धातु (ताम्बा /काँसा ) के प्रयोग तक चला। ट्रम्प की यह धमकी स्वयं को सर्व शक्तिमान समझने की गलतफहमी के आलावा कुछ भी नही हो सकती है।

दुनियाँ जब प्रगति के नवीन आयामों को छू रही है, तब किसी देश को पाषाण युग में पहुंचाने का यह अंहकारी बयान युद्ध की विभीषिका को और बढ़ाने का संकेत है। ट्रम्प का यह मानसिक दिवालियापन विश्व शांति के लिए बड़ा खतरा है। अपने वजूद को कायम रखने की सनक इंसान को क्रूरतम फैसले लेने की हद तक ले जाती है। ट्रम्प का इजरायल-ईरान युद्ध में हस्तक्षेप के बाद दुश्मन देश से अपनी शर्तो पर युद्ध विराम का एक तरफा राग जिसे अब तक ईरान ने अनसुना किया है,अपितु इसे मानने से भी इंकार कर दिया। क्रोधित ट्रम्प ने ईरान को पाषाण युग में पहुंचाने की धमकी दे डाली।

अगरचे इस बात से इंकार नही किया जा सकता की अमेरिका की सामरिक ताकत का कोई मुकाबला नही है। अमेरिका का सैन्य बजट दुनिया में सबसे ज्यादा है, जो लगभग 886 अरब डालर का है। अमेरिकी सेना 11 परमाणु संचालित एयर क्राफ्ट कैरियर और 13 हजार से अधिक सैन्य विमान से सुसज्जित है। उसके पास लगभग 5200 परमाणु वारहेड है। 70 से अधिक देशो में सैन्य ठिकाने है। अमेरिका साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशल इंटलीजेंस और स्पेस रिसर्च में सबसे आगे है। दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति है जिसका सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 26 ट्रिलियन डालर का है। दुनिया की सबसे बड़ी सामरिक ताकत होने के कारण ट्रम्प द्वारा दिए बयानों को हल्के में भी नहीं लिया जा सकता है।

कुलमिलाकर विश्व के शक्तिशाली देश के नेता को नवनिर्माण और प्रगति के संदेश देना चाहिए। शांति का नोबेल पाने की चाह रखने वाले विश्व के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति को तो विश्व शांति के प्रयासों पर बल देना चाहिए। दुनियाँ का अस्तित्व शांति से कायम रह सकता है। ईरान को पाषाण युग में पहुंचाने का ट्रम्प का विचार हिंसक और विकास विरोधी है। इसकी पुरजोर आलोचना दुनिया के देशों को करना चाहिए। विश्व के देशों को अमेरिका, इजरायल विरुद्ध ईरानी युद्ध में शांति के जोरदार प्रयासों को अंजाम देकर दुनियाँ को विध्वंसकारी विचारों से बचाने की पुरजोर कोशिश करना चाहिए।

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नरेंद्र तिवारी स्वतंत्र लेखक 

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