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झारखंड शराब घोटाले में पूर्व IAS अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर कोर्ट ने उठाए सवाल


रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-झारखंड शराब घोटाले से जुड़े बहुचर्चित मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें सशर्त अग्रिम जमानत देते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब टुटेजा पिछले करीब डेढ़ साल से जेल में थे, तो इस दौरान उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई।


सिंगल बेंच ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए टुटेजा को अग्रिम जमानत देने का आदेश पारित किया। मामले में एसीबी और ईओडब्ल्यू ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी के तहत अपराध दर्ज किया था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और अन्य आरोपियों ने झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल के आधार पर कथित तौर पर एक शराब सिंडिकेट तैयार किया। आरोप है कि आबकारी नीति में बदलाव कर अपने करीबी ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया और करोड़ों रुपए का अवैध कमीशन कमाया गया।


हालांकि बचाव पक्ष ने अदालत में दायर याचिका में दावा किया कि यह मामला उन्हें लगातार जेल में बनाए रखने की साजिश का हिस्सा है। याचिका में कहा गया कि एक मामले में राहत मिलने के बाद दूसरी एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी का आधार तैयार किया जाता रहा।

टुटेजा की ओर से अदालत को बताया गया कि पिछले पांच वर्षों में कई जांच एजेंसियों ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन कोई अवैध संपत्ति, बेहिसाब नकदी या संदिग्ध वित्तीय दस्तावेज बरामद नहीं हुए। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि जांच एजेंसियों के पास ऐसा कोई ठोस डिजिटल या वित्तीय साक्ष्य नहीं है, जो उन्हें झारखंड के अधिकारियों से सीधे तौर पर जोड़ता हैं


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसियों ने अब तक इस मामले में टुटेजा को औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया है, जबकि कई अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।


अदालत ने टुटेजा को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और समान राशि के दो सॉल्वेंट श्योरिटी पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्हें जांच में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित न करने और अदालत की शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शर्तों का उल्लंघन होता है, तो जांच एजेंसी उनकी जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकती है।

जांच एजेंसियों ने जमानत का विरोध करते हुए अनिल टुटेजा को पूरे कथित शराब घोटाले का “मास्टरमाइंड” बताया। एजेंसियों का आरोप था कि रायपुर में बैठकर झारखंड के अधिकारियों के साथ साजिश रची गई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, जांच की स्थिति और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए टुटेजा को राहत प्रदान कर दी।

प्रशांत गौतम

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