बिलासा एयरपोर्ट विस्तार पर हाईकोर्ट सख्त: 30 दिन में नाइट लैंडिंग संभव, विकास कार्यों की प्रगति पर मांगा शपथ पत्र

बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-बिलासा एयरपोर्ट के विस्तार और सुविधाओं को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने विमानन विभाग के संचालक को एयरपोर्ट विकास से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
विकास कार्यों की स्पष्ट योजना मांगी
कोर्ट ने एयरपोर्ट की वर्तमान सुविधाओं और प्रस्तावित निर्माण कार्यों का पूरा खाका पेश करने को कहा है। विशेष रूप से इन बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है—
वर्तमान में उपलब्ध सुविधाएं क्या हैं?
भविष्य में किन-किन निर्माण कार्यों का प्रस्ताव है?
नाइट लैंडिंग शुरू होने के बाद तकनीकी व सहायक स्टाफ की संख्या पर्याप्त है या नहीं?
गर्मी के मौसम में कितनी उड़ानें संचालित होंगी और किन नए शहरों को जोड़ा जाएगा?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट के विकास को लेकर ठोस और समयबद्ध योजना सामने आनी चाहिए।
30 दिनों में शुरू हो सकती है नाइट लैंडिंग
सुनवाई के दौरान एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिवक्ता ने बताया कि नाइट लैंडिंग के लिए ‘नोटाम’ (NOTAM) जारी किया जा चुका है। आवश्यक तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होते ही अगले 30 दिनों के भीतर रात में विमानों की आवाजाही शुरू की जा सकती है।
नाइट लैंडिंग सुविधा शुरू होने से यात्रियों को देर शाम और रात की उड़ानों का लाभ मिलेगा, जिससे बिलासपुर की हवाई कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।
स्टाफ की कमी और फंड उपयोग पर सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से एयरपोर्ट पर स्टाफ की कमी का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया गया। दलील दी गई कि पर्याप्त तकनीकी और सहायक कर्मियों के बिना नाइट लैंडिंग जैसी महत्वपूर्ण सुविधा प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पाएगी।
इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा आवंटित विकास निधि के उपयोग पर भी सवाल खड़े किए गए। कोर्ट ने संकेत दिया कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सरकार ने दिया आश्वासन
केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने अदालत को आश्वस्त किया कि एयरपोर्ट के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
हाईकोर्ट ने माना कि एयरपोर्ट पर कार्य प्रगति पर है, इसलिए विभाग को विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने के लिए समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई मार्च माह में निर्धारित की गई है।
अब बिलासपुर के नागरिकों की नजर इस पर टिकी है कि नाइट लैंडिंग की बहुप्रतीक्षित सुविधा कब तक जमीन पर हकीकत बनती है और एयरपोर्ट को क्षेत्रीय हवाई हब के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस कदम कब तक दिखाई देते हैं।




