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*बेलतरा में ‘सुपारी सियासत’ का बड़ा खुलासा: 25 लाख में हत्या की डील का दावा, मंडल अध्यक्ष घेरे में—विधायक की चुप्पी पर तीखे सवाल, क्या यही है ‘पार्टी विद डिफरेंस’ का असली चेहरा?*

छत्तीसगढ़ उजाला

 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। बेलतरा विधानसभा की राजनीति इन दिनों गंभीर आरोपों के भंवर में घिरती नजर आ रही है। राजकिशोर नगर वसंत विहार स्थित एक ज्वेलर्स संचालक पर हुए प्राणघातक हमले और लूटकांड की जांच ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि आरोपियों का गिरोह केवल लूट तक सीमित नहीं था, बल्कि शहर के चर्चित सब्जी कारोबारी और भाजपा पार्षद बंधु मौर्य की कथित सुपारी किलिंग की साजिश भी रची गई थी।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बिलासा गुड़ी में आयोजित पत्रकार वार्ता में खुलासा किया कि आरोपियों ने 25 लाख रुपये में हत्या की सुपारी लेने की बात स्वीकार की है। इसमें 6 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए जाने की पुष्टि भी जांच में सामने आई है।

जांच के दौरान भारतीय जनता पार्टी के बेलतरा पूर्वी मंडल अध्यक्ष राजू सोनकर का नाम सामने आया है। सोनकर को बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला का करीबी माना जाता है। इस खुलासे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
“अपराध पर चुप्पी क्यों?” — कांग्रेस का हमला
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने पूछा कि जब सत्ताधारी दल का मंडल अध्यक्ष हत्या की सुपारी जैसे गंभीर आरोपों में घिरा हो, तब पार्टी नेतृत्व की चुप्पी क्यों है?
गौरहा ने कहा कि बेलतरा विधानसभा की छवि धूमिल हुई है। व्यापारी वर्ग में भय का माहौल है और आम नागरिक असमंजस में हैं। यदि पुलिस ने सार्वजनिक रूप से खुलासा किया है, तो संगठन अब तक स्पष्ट रुख क्यों नहीं ले रहा?
विधायक से सीधा सवाल
अंकित गौरहा ने विधायक सुशांत शुक्ला से सीधे जवाब की मांग की। उनका कहना है कि मंडल अध्यक्ष जैसे अहम पद पर नियुक्ति किस आधार पर की गई? क्या संगठन ने पृष्ठभूमि की जांच की थी? यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो पार्टी स्तर पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मामले को दबाने की कोशिश की गई, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। जमीन विवाद, डकैती और हत्या की साजिश जैसे मामलों में सत्ता से जुड़े नाम सामने आना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।
सियासत में बढ़ी सरगर्मी
पुलिस कार्रवाई के बाद बेलतरा की सियासत नैतिक जवाबदेही की कसौटी पर आ खड़ी हुई है। “पार्टी विथ डिफरेंस” का दावा करने वाली भाजपा से अब पारदर्शिता और स्पष्टता की अपेक्षा की जा रही है।
बेलतरा की जनता ने विकास के नाम पर जनादेश दिया था, लेकिन अब वही जनता सवाल पूछ रही है—क्या कानून सत्ता से जुड़े नामों पर भी समान रूप से लागू होगा, या राजनीतिक चुप्पी सच्चाई पर पर्दा डाले रखेगी?
मामला फिलहाल जांच के दायरे में है, लेकिन इतना तय है कि इस खुलासे ने बेलतरा की राजनीति में भूचाल ला दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस की अगली कार्रवाई और पार्टी नेतृत्व का रुख, दोनों ही राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

प्रशांत गौतम

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