छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति 2026-27 को मंजूरी, 1 अप्रैल से लागू होंगे बड़े बदलाव :आरपीईटी बोतलों में बिकेगी शराब

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए संशोधित आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी होगी। इस बार सरकार ने शराब बिक्री और वितरण व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शिता और अवैध कारोबार पर रोक को प्राथमिकता दी है।
अब आरपीईटी बोतलों में मिलेगी देशी और चुनिंदा विदेशी शराब
नई नीति के तहत देशी और कुछ श्रेणी की विदेशी मदिरा फूड-ग्रेड आरपीईटी (रीसाइक्लेबल प्लास्टिक) बोतलों में उपलब्ध कराई जाएगी। ये बोतलें पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग के लिए डिजाइन की गई हैं, जिससे प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
देशी शराब 750 एमएल, 375 एमएल और 180 एमएल की निर्धारित मात्रा में आरपीईटी बोतलों में बेची जाएगी। प्रत्येक बोतल पर सरकारी चिह्न और एक्साइज एडेसिव लेबल अनिवार्य रहेगा।
पैकेजिंग में सख्ती, एक ब्रांड–एक पैकिंग नियम
विदेशी मदिरा की कुछ श्रेणियां केवल फाइबर बोतलों में उपलब्ध होंगी, जबकि अन्य के लिए कांच या फूड-ग्रेड बोतलों का विकल्प रहेगा। किसी भी ब्रांड को दो अलग-अलग पैकेजिंग में बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे नकली और अवैध शराब की बिक्री पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
35 नई मदिरा दुकानें खोलने का रास्ता साफ
सरकार ने पूर्व में स्वीकृत लेकिन शुरू नहीं हो सकीं 35 मदिरा दुकानों को खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। जिलों के कलेक्टर आवश्यकता और नियमानुसार प्रस्ताव भेज सकेंगे, विशेषकर उन क्षेत्रों के लिए जहां अधिकृत दुकानें नहीं हैं या जो अंतरराज्यीय सीमाओं से जुड़े हुए हैं।
इस कदम से अवैध शराब बिक्री और तस्करी पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
प्रीमियम विदेशी मदिरा की अलग दुकाने
नई व्यवस्था के तहत आवश्यकता अनुसार प्रीमियम विदेशी मदिरा की अलग दुकानें खोलने का भी प्रावधान किया गया है। जिला प्रशासन के प्रस्ताव और शासन की स्वीकृति के बाद इनका संचालन शुरू किया जाएगा।
राज्य सरकार का दावा है कि संशोधित आबकारी नीति से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। माना जा रहा है कि यह नीति राज्य के शराब बाजार में बड़े संरचनात्मक बदलाव लाने वाली साबित होगी।




