बिलासपुर: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, RES में 15 साल पहले नियुक्त 67 उप अभियंताओं की नियुक्ति रद्द

(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा (RES) में वर्ष 2011 के दौरान नियुक्त किए गए 67 उप अभियंताओं (सिविल) की नियुक्तियों को अवैध करार देते हुए उन्हें निरस्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया वैधानिक नियमों के विपरीत की गई थी, इसलिए इन नियुक्तियों को प्रारंभ से ही शून्य माना जाएगा।
यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की द्वैधपीठ (डीबी) ने सुनाया।
कट-ऑफ तिथि तक योग्यता अनिवार्य
मामले में याचिकाकर्ता रवि तिवारी की ओर से अधिवक्ता शाल्विक तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर RES की वर्ष 2011 की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि विज्ञापन में स्पष्ट रूप से यह शर्त थी कि अभ्यर्थियों के पास कट-ऑफ तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई अभ्यर्थियों ने आवश्यक डिग्री अथवा डिप्लोमा नियुक्ति के बाद प्राप्त किया, जिससे उनकी नियुक्तियां कानूनन अवैध हो गईं।
पदों से अधिक नियुक्तियां भी नियमों के खिलाफ
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जहां कुल 275 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, वहीं उससे अधिक पदों पर नियुक्तियां की गईं। न्यायालय ने इसे सेवा कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए गंभीर अनियमितता माना।
सहानुभूति की दलील खारिज
नियुक्त अभियंताओं की ओर से यह तर्क दिया गया कि वे लगभग 14 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, इसलिए उनके मामलों में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लंबी सेवा अवधि किसी अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती और सहानुभूति के आधार पर वैधानिक नियमों से समझौता नहीं किया जा सकता।
क्वो वारंटो जारी, नियुक्तियां निरस्त
इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने क्वो वारंटो का रिट जारी करते हुए 67 उप अभियंताओं की नियुक्तियां निरस्त कर दीं। इस फैसले के बाद ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा विभाग में हड़कंप मच गया है और प्रशासनिक स्तर पर इसके व्यापक प्रभाव की संभावना जताई जा रही है।



