काम के आकलन पर तबादलों की कड़ी: 6 दिन पहले SDM-तहसीलदार बदले, अब कलेक्टर का भी हुआ स्थानांतरण
प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर, लेकिन आदेशों में केवल कार्य मूल्यांकन का आधार; किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका के दावों की पुष्टि नहीं।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही-(छत्तीसगढ़ उजाला)-जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रहे प्रशासनिक फेरबदल को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, उपलब्ध सरकारी आदेशों के अनुसार इन तबादलों का आधार अधिकारियों के कार्यों का आकलन बताया गया है।
करीब छह दिन पहले कलेक्टर द्वारा जिले के एसडीएम, तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक (आरआई) का स्थानांतरण उनके कार्य के मूल्यांकन के आधार पर किया गया था। अब राज्य शासन ने भी कलेक्टर का स्थानांतरण कर दिया है। इसे भी प्रशासनिक कार्यों के आकलन के आधार पर लिया गया निर्णय माना जा रहा है।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि शासन समय-समय पर अधिकारियों के प्रदर्शन और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानांतरण करता है। ऐसे में किसी भी तबादले को बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी व्यक्ति, अस्पताल प्रबंधन या अन्य संस्था से जोड़ना उचित नहीं होगा।
फिलहाल जारी आदेशों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि कलेक्टर के स्थानांतरण के पीछे किसी अस्पताल प्रबंधन, जनप्रतिनिधि या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही हो। ऐसे में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर चल रही अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासनिक हलकों में इस स्थानांतरण को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। आमतौर पर किसी जिले में कलेक्टर का कार्यकाल इससे अधिक होता है, ऐसे में करीब दो माह के भीतर ही कलेक्टर का स्थानांतरण होना अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है। इस आदेश के बाद कलेक्टर की निर्णय क्षमता, कार्यकुशलता और प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, राज्य शासन ने अपने स्थानांतरण आदेश में किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया है। आदेश को प्रशासनिक आधार पर जारी किया गया है और इसमें किसी अस्पताल प्रबंधन, व्यक्ति या बाहरी दबाव का कोई उल्लेख नहीं है।



