
कोरिया/बैकुण्ठपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-नगर के फौव्वारा चौक स्थित नजूल भूमि (खसरा नंबर 155/2) पर जारी अवैध निर्माण ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। एसडीएम कार्यालय, बैकुण्ठपुर द्वारा निर्माण कार्य रोकने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भवन निर्माण तेजी से जारी है और अब यह तीसरी मंज़िल तक पहुँच चुका है।
निर्माणाधीन भवन में न तो सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं और न ही मजदूरों का श्रम पंजीयन दिखाई देता है—यह स्थिति किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को दावत दे रही है। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि जिस सरकारी भूमि पर यह निर्माण खड़ा किया जा रहा है, उसी पर बने सामुदायिक भवन के सेप्टिक टैंक और नाली को भी बंद कर दिया गया है। यह न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की श्रेणी में आता है, बल्कि गंभीर अनियमितताओं को भी उजागर करता है।
गौरतलब है कि नजूल आर.आई. ने 19 अगस्त 2021 को प्रतिवेदन देते हुए बताया था कि स्थल पर निर्माण बन्द है। इसके बाद सितंबर 2025 में एसडीएम कार्यालय की नोटशीट में भी निर्माण बंद कराने का उल्लेख किया गया, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है—निर्माण बिना रोक-टोक जारी है और जिला प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
जिला जेल की सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन
नजूल भूमि पर बना यह अवैध ढांचा जिला जेल बैकुण्ठपुर की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रहा है। जेल परिसर के 100 से 500 मीटर दायरे में किसी भी प्रकार की ऊँची इमारत या संरचना बनाना नियमों के विरुद्ध है। जेल प्रशासन ने स्वयं तीसरी मंज़िल के निर्माण पर आपत्ति दर्ज की है और लिहाज़ा इसे रोकने की मांग भी की है।
महिला बंदियों की उपस्थिति के कारण यह निर्माण निजता के गंभीर उल्लंघन का विषय भी बन चुका है। इसके बावजूद निर्माणकर्ता और संबंधित विभागों द्वारा आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया है।
मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़, श्रम विभाग की खामोशी
निर्माण स्थल पर मजदूर बिना हेलमेट, बेल्ट, सेफ्टी नेट और अन्य सुरक्षा साधनों के कार्य कर रहे हैं। भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार अधिनियम के तहत यह पूरी तरह अवैध है।
कानून के अनुसार श्रम विभाग को तत्काल निरीक्षण कर नोटिस जारी करना और 15–30 दिनों के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य है, लेकिन यहां महीनों से निर्माण जारी है और श्रम विभाग पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। मजदूरों का न पंजीयन किया गया है और न ही किसी प्रकार का बीमा—यह सीधा मानव जीवन से खिलवाड़ है।
प्रशासनिक उदासीनता पर उठ रहे गंभीर सवाल
कलेक्टर कोरिया द्वारा शासकीय भूमि की सुरक्षा और अवैध अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद नगर पालिका और एसडीएम कार्यालय के सामने ही नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
जिला मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर हो रहा यह अवैध निर्माण प्रशासन की लापरवाही का प्रत्यक्ष उदाहरण बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।




