नया रायपुर में 10 हजार एनएचएम कर्मियों का जेल भरो आंदोलन, सरकार के खिलाफ गरजे

रायपुर, 18 सितम्बर 2025।
छत्तीसगढ़ में नियमितीकरण समेत 10 सूत्रीय मांगों को लेकर एनएचएम संविदा कर्मचारियों की हड़ताल लगातार जारी है। गुरुवार को रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग से करीब 10 हजार कर्मचारी नया रायपुर के राजेश्वर मैदान पहुंचे और ‘जेल भरो आंदोलन’ किया। प्रशासन ने करीब डेढ़ घंटे तक इस मैदान को प्रतीकात्मक जेल में बदल दिया था, जहां सभी कर्मचारी बंद रहे। इसके बाद प्रत्येक का नाम व हस्ताक्षर दर्ज कर उन्हें रिहा कर दिया गया।
रायपुर जिले के एनएचएम संघ अध्यक्ष ने बताया कि प्रदर्शन के बाद कर्मचारी अपने-अपने जिलों को लौट गए हैं। शुक्रवार से आंदोलन जिला स्तर पर जारी रहेगा। हड़ताली कर्मियों ने साफ कहा कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन खत्म नहीं होगा। यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो उग्र आंदोलन और आत्मदाह जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी गई है।
आज हड़ताल का 32वां दिन रहा। सरकार ने 16 सितंबर तक ड्यूटी पर लौटने का अंतिम अल्टीमेटम दिया था, मगर कर्मचारियों ने काम पर वापसी से इनकार कर दिया। इसके बाद कार्रवाई करते हुए सूरजपुर जिले में 17 सितंबर को 594 कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई। इससे पहले बलौदाबाजार और कोरबा जिलों में भी लगभग 200 कर्मियों को बर्खास्त किया गया था।
10 सूत्रीय मांगों पर गतिरोध बरकरार
कर्मचारी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर डटे हुए हैं। इनमें से पांच पर मौखिक सहमति बनी है, लेकिन बाकी पांच पर सरकार ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। एनएचएम संघ का कहना है कि केवल मौखिक भरोसे से काम नहीं चलेगा, सभी मांगें लिखित आदेश के साथ पूरी करनी होंगी।
प्रदेश अध्यक्ष अमित कुमार मिरी ने कहा कि जेल भरो आंदोलन के बाद सरकार की ओर से बातचीत की पहल दिख रही है। साथ ही जिन कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है, उनकी बहाली हमारी प्राथमिक मांग है।
पहले ही दे चुके हैं सामूहिक इस्तीफा
दरअसल, सरकार की कार्रवाई से पहले ही संविदा कर्मचारी सामूहिक इस्तीफा सौंप चुके हैं। 3 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग ने 25 कर्मियों को बर्खास्त किया था, जिनमें एनएचएम संगठन के संरक्षक हेमंत सिन्हा और महासचिव कौशलेश तिवारी भी शामिल थे। इसके बाद से आंदोलन और तेज हो गया है। वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की स्थिति में पहुंच चुकी हैं।



