बिलासपुर पुलिस की कार्रवाई का स्वागत, लेकिन कई ‘यक्ष प्रश्न’ अब भी अनुत्तरित……पथराव और हिंसा की घटना को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से डॉ प्रसून चतुर्वेदी ने उठाए सवाल; निष्पक्ष जांच और SIT गठन की मांग
बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-शहर में पिछले दिनों हुई हिंसा, पथराव और तनाव के मामले में बिलासपुर पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई का एक ओर स्वागत किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हिंदू पक्ष से जुड़े लोगों ने पुलिस की जांच और गिरफ्तारियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए, लेकिन कार्रवाई निष्पक्ष हो और घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों की भी जांच की जाए।
हिंदू पक्ष का सबसे बड़ा सवाल पुलिस द्वारा घटना को कथित रूप से पुरानी रंजिश से जोड़ने को लेकर है। उनका दावा है कि विवाद में शामिल दोनों पक्ष पहले से एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे। ऐसे में यह पता लगाया जाना आवश्यक है कि विवाद अचानक कैसे इतना बड़ा हो गया और इतनी बड़ी संख्या में लोग कुछ ही समय में मौके पर कैसे पहुंच गए।
इतनी बड़ी मात्रा में पत्थर आखिर आए कहां से?घटना के दौरान हुए पथराव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विवाद अचानक हुआ था तो रिहायशी अथवा व्यावसायिक क्षेत्र में इतनी मात्रा में पत्थर तत्काल कैसे उपलब्ध हो गए?अब इस मामले कुछ फर्जी नेता अपनी दुकान चमकाने के लिए राम सिंह पर आरोप लगाने में लगे है।बल्कि घटना के समय राम सिंह पुलिस वालों के बीच में था। और मामले को शांत करने के काम में दिख रहा था।इस पूरे प्रकरण में हिंदू पक्ष आरोपी कैसे बन गया यह समझ से परे है।
यदि पत्थर पहले से जमा थे तो वे किस उद्देश्य से रखे गए थे और किसने जमा किए थे? इसकी जांच पुलिस को साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और उपलब्ध ड्रोन फुटेज के आधार पर करनी चाहिए। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पथराव की शुरुआत किस तरफ से हुई और इसमें कौन-कौन शामिल था।
घायल पुलिस अधिकारी पर हमला किसने किया?
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण प्रश्न मौके पर पुलिसकर्मियों के घायल होने से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का कहना है कि जिस पुलिस अधिकारी को पत्थर लगने से चोट आई, उस मामले में भी स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि हमला किस दिशा से हुआ और उपलब्ध वीडियो या ड्रोन फुटेज में आरोपी की पहचान हुई या नहीं।पुलिस के पास यदि इसका वीडियो साक्ष्य मौजूद है तो उसी के आधार पर वास्तविक दोषियों की पहचान और कार्रवाई होनी चाहिए। इससे जांच की निष्पक्षता को लेकर पैदा हो रहे संदेह भी दूर होंगे।
राम सिंह को आरोपी बनाने पर भी सवाल….
हिंदू पक्ष विशेष रूप से राम सिंह को आरोपी बनाए जाने पर सवाल उठा रहा है। उनका दावा है कि घटनाक्रम के दौरान राम सिंह पुलिस के साथ मौजूद थे। ऐसे में पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके विरुद्ध कौन से साक्ष्य मिले और किस आधार पर उन्हें अभियुक्त बनाया गया।
इसी प्रकार सवाल उठाया जा रहा है कि जिन लोगों की बाद में तलाश कर गिरफ्तारी की जा रही है, उनमें से कुछ कथित रूप से घटना वाली रात पुलिस के सामने मौजूद थे। यदि उनके खिलाफ उसी समय पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध थे तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि साक्ष्य बाद में मिले हैं तो पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे साक्ष्य क्या हैं।
विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री के आरोपों की भी हो जांच
घटना से जुड़ी चर्चाओं में बम अथवा विस्फोटक जैसी सामग्री के इस्तेमाल के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की विस्फोटक सामग्री वास्तव में बरामद हुई है तो यह बेहद गंभीर विषय है और पुलिस को उसके स्रोत, निर्माण, भंडारण तथा इस्तेमाल से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच करनी चाहिए।साथ ही किसी धार्मिक स्थल या समुदाय को केवल संदेह के आधार पर कठघरे में खड़ा करने के बजाय, यदि किसी स्थान के संबंध में पुलिस के पास ठोस सूचना या कानूनी आधार है तो वहां कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। जांच का दायरा व्यक्ति और साक्ष्य आधारित होना चाहिए, न कि धर्म आधारित।
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग…..
हिंदू पक्ष अब इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि पुलिस की कार्रवाई पर विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है कि घटना के प्रत्येक पहलू को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।
मांग की जा रही है कि पूरे घटनाक्रम की जांच किसी वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी अथवा विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए। घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी, मोबाइल वीडियो, ड्रोन फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की समयवार जांच कर यह निर्धारित किया जाए कि हिंसा की शुरुआत कैसे हुई, पत्थर कहां से आए, भीड़ कैसे जुटी, पुलिसकर्मी किसके हमले में घायल हुए और किन व्यक्तियों की भूमिका के प्रमाण उपलब्ध हैं।
हिंदू पक्ष की ओर से डॉ प्रसून चतुर्वेदी का कहना है कि “दोषी चाहे किसी भी पक्ष का हो, उस पर कठोर कार्रवाई हो; लेकिन किसी निर्दोष युवक को केवल भीड़ में मौजूद होने के आधार पर अपराधी न बनाया जाए।” ठाकुर राम सिंह को निशाना बनाने का काम शांति दूत कहे जाने वाले फर्जी लोग करने में लगे है।इस मामले में पुलिस प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से करने की आवश्यकता है।
बिलासपुर जैसे शांत और भाईचारे के शहर में इस घटना की निष्पक्ष जांच इसलिए भी जरूरी है ताकि अफवाहों और आरोप-प्रत्यारोप के स्थान पर तथ्य सामने आएं। पुलिस प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि यह भरोसा कायम करना भी है कि कार्रवाई बिना किसी दबाव, भेदभाव या पक्षपात के केवल साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
सवाल यही है—क्या पुलिस इन ‘यक्ष प्रश्नों’ का तथ्य और साक्ष्य के साथ जवाब देकर शहर के सामने घटना की पूरी तस्वीर रखेगी? शांति मार्च के साथ आपसी वास्तविक प्रेम और विश्वास सुदृढ़ होंगे , जिससे एक पक्षीय संतुष्टीकरण की तुच्छ राजनीतिक बयानबाजी वाले लोगों को भी सरकार और पुलिस की कार्यवाही पर अनर्गल बयानों का अवसर ना प्राप्त हो ।




