नीलांबरी फाउंडेशन के बैनर तले ‘अपराजिता’ काव्यसंग्रह का भव्य विमोचन, मुंबई में सजी साहित्यिक महफिल

मुंबई (विक्रोली)। नीलांबरी फाउंडेशन के बैनर तले अंगिका भाषा में रचित काव्यसंग्रह ‘अपराजिता’ का भव्य विमोचन समारोह विक्रोली, मुंबई में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस विशेष आयोजन का संयोजन साहित्यकार रोमा झा द्वारा किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित कवियों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों की प्रभावशाली उपस्थिति रही।
‘अपराजिता’ काव्यसंग्रह का प्रकाशन निकष प्रकाशन द्वारा अशोक सिंह सत्यवीर के निर्देशन में किया गया है, जबकि इसका संपादन कश्मीरा सिंह ने किया है। यह संग्रह अंगिका भाषा की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सशक्त प्रयास है।
इस काव्यसंग्रह में नौ विशिष्ट कवयित्रियों—कश्मीरा सिंह, डॉ. विद्या रानी, डॉ. मीरा झा, डॉ. आभा पूर्वे, डॉ. शोभा कुमारी, रूपम झा, रोमा झा, दामिनी चौधरी और उलूपी झा—की रचनाएं शामिल हैं। सभी रचनाकार अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित पदों पर रह चुकी हैं, जिससे संग्रह की साहित्यिक गरिमा और भी बढ़ जाती है।
पुस्तक की विशेषता यह भी रही कि इसमें रोमा झा की रचनाओं के साथ उनकी माता, विदुषी एवं साहित्य प्रेमी डॉ. मीरा झा की रचनाएं भी शामिल हैं, जो इस संग्रह को भावनात्मक और सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक समृद्ध बनाती हैं।
विमोचन समारोह में मुंबई के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय शायर, कवि, विचारक एवं मंच संचालक पंडित सागर त्रिपाठी तथा ‘हिडिंबा’ और ‘अट्ठन्नीवाले बाबू जी’ जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक पंडित पवन तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा नंदलाल क्षितिज, कवयित्री एवं संचालिका पल्लवी रानी, रमाकांत ओझा, पत्रकार लक्ष्मीकांत कमलनयन, अमिताभ कुंदन, कृतायन पाण्डेय और वैष्णवी तिवारी सहित अनेक साहित्य प्रेमियों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम में नीलांबरी फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. नीलिमा पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति भी रही, जिन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए इसे अंगिका साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
आयोजन की सफलता में रोमा झा के साथ उनके पति रमन झा, पुत्र रोमेन रमन झा और पुत्रवधू अंकिता त्यागी का विशेष योगदान रहा। सभी ने मिलकर कार्यक्रम की उत्कृष्ट व्यवस्था और अतिथियों के लिए शानदार जलपान की व्यवस्था सुनिश्चित की।
कार्यक्रम के अंत में रोमा झा ने उपस्थित सभी अतिथियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए यादगार रहा, बल्कि अंगिका भाषा के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।




