पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम की टिप्पणी से भाजपा में हलचल, बिलासपुर कार्यक्रम का बयान बना सियासी चर्चा का विषय

बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-शनिवार को मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के साथ कृषि मंत्री Ramvichar Netam बिलासपुर प्रवास पर पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास और गौधाम का लोकार्पण किया। कार्यक्रम Guru Ghasidas Vishwavidyalaya में आयोजित किया गया था।
हालांकि कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मंच से दिए गए एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के दिग्गज नेताओं से लेकर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं तक, कई लोग मंत्री की टिप्पणी को लेकर असहज नजर आ रहे हैं। खासकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री Amar Agrawal को लेकर कही गई बात को पार्टी के भीतर ही अनुचित बताया जा रहा है।
मंच से कही बात बनी विवाद की वजह
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री नेताम बिलासपुर के कलेक्टर Sanjay Agrawal की कार्यशैली की सराहना करते नजर आए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर अच्छा काम कर रहे हैं और जनता के बीच लोकप्रिय भी हैं। इसी दौरान उन्होंने मंच से यह भी कह दिया कि “विधायक अमर जी की कुर्सी खतरे में है।”
मंत्री की यह टिप्पणी कार्यक्रम के विषय से हटकर मानी जा रही है, क्योंकि कार्यक्रम मुख्य रूप से गौ संरक्षण, संवर्धन और किसानों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था। यही कारण है कि भाजपा के भीतर अब यह सवाल उठने लगा है कि ऐसे कार्यक्रम में इस तरह की राजनीतिक टिप्पणी करने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता की लंबी राजनीतिक पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ की राजनीति में अमर अग्रवाल की पहचान एक कद्दावर नेता के रूप में रही है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद तक वे सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
अमर अग्रवाल ने संगठन और सरकार दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई और लगभग डेढ़ दशक तक राज्य मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
इसी वजह से भाजपा के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि इतने बड़े कद वाले नेता को लेकर मंच से इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं था।
कलेक्टर के कामकाज की हो रही सराहना
दूसरी ओर बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के कामकाज की भी सराहना की जा रही है। वे पहले बिलासपुर में एसडीएम के रूप में भी कार्य कर चुके हैं और जिले की प्रशासनिक व भौगोलिक परिस्थितियों से भलीभांति परिचित माने जाते हैं।
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी सक्रियता के कारण कई योजनाओं के बेहतर परिणाम सामने आने की बात भी कही जा रही है।
मंत्री के बयान से बढ़ी सियासी चर्चा
मंत्री नेताम की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या सत्ता के प्रभाव में ऐसी बातें मंच से कही गईं। कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि एक मंत्री को किसी प्रशासनिक अधिकारी की इतनी सार्वजनिक प्रशंसा करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की चर्चा रायपुर से लेकर दिल्ली तक पार्टी के अंदरूनी गलियारों में हो रही है। कुछ लोग इसे सामान्य टिप्पणी बता रहे हैं, जबकि कई कार्यकर्ता इसे अनुचित मानते हुए असंतोष भी जता रहे हैं।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं मंत्री
राजनीतिक हलकों में यह भी याद दिलाया जा रहा है कि कृषि मंत्री रामविचार नेताम पहले भी विवादों में रह चुके हैं। एक बार एक राज्य प्रशासनिक अधिकारी को रेस्ट हाउस में बुलाकर थप्पड़ मारने का मामला भी काफी चर्चा में रहा था।
इसके अलावा उनके विभाग को लेकर भ्रष्टाचार की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में हालिया बयान ने भाजपा के अंदर असंतोष और आपसी मतभेद की चर्चा को और हवा दे दी है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला केवल एक सामान्य बयान तक सीमित रहता है या आने वाले समय में इसका कोई बड़ा राजनीतिक असर भी देखने को मिलता है। पार्टी के भीतर यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि हाईकमान मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करता है तो इस विवाद का असर भी नजर आ सकता है।



