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न्यायालय का आदेश भी बेअसर: दुलारसाय की भूमि आखिर गई कहां?


प्रशासनिक लापरवाही या भू-माफियाओं का दबदबा?

कोरिया/बैकुंठपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)
ग्राम खरवत स्थित खसरा नंबर 2096, 2097 एवं 2099 की भूमि को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और भू-माफियाओं के कथित गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश, नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने और राजस्व रिकॉर्ड में भूमि दर्ज होने के बावजूद भू-स्वामी दुलारसाय को आज तक अपनी जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला न्यायालय ने 10 फरवरी 2016 को दुलारसाय के पक्ष में निर्णय पारित किया था। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में तहसील कार्यालय द्वारा नामांतरण की कार्रवाई भी पूरी कर दी गई, जिसके बाद राजस्व अभिलेखों में उक्त भूमि दुलारसाय के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है। लेकिन कागजों में मौजूद यह जमीन जमीनी हकीकत में कहीं नजर नहीं आ रही।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब न्यायालय का आदेश और राजस्व रिकॉर्ड दोनों दुलारसाय के पक्ष में हैं, तो फिर वास्तविक जमीन आखिर कहां चली गई?

जांच के नाम पर खानापूर्ति?

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बार-बार शिकायतों और मांग के बावजूद जिला स्तरीय सदस्यीय जांच टीम अब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि या तो राजस्व अमले की घोर लापरवाही इस देरी का कारण है, या फिर अवैध कब्जाधारियों से मिलीभगत के चलते जांच को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है।

इसी उदासीनता का नतीजा है कि दुलारसाय वर्षों से न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों और अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है।

भू-माफियाओं का खौफ, प्रशासन बेबस?

क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि भू-माफियाओं का दबदबा इतना अधिक है कि कई राजस्व कर्मचारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन से भी हिचकिचाते हैं। जब न्यायालय के आदेश के बावजूद भूमि का कब्जा नहीं दिलाया जा रहा, तो आम नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है।

कब खुलेगी प्रशासन की आंख?

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि प्रशासन कब तक आंखें मूंदे रहेगा और दुलारसाय की भूमि की वास्तविक स्थिति सामने कब आएगी। यदि शीघ्र निष्पक्ष और प्रभावी जांच कर वैधानिक कब्जा नहीं दिलाया गया, तो यह मामला पूरे जिले में कानून व्यवस्था और राजस्व प्रशासन की विश्वसनीयता पर गहरा धब्बा बन सकता है।

प्रशांत गौतम

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