18 साल बाद फिर गूंजा छत्तीसगढ़ का पहला राज्य खेल गीत! 2005 में तत्कालीन खेल आयुक्त राजीव श्रीवास्तव IPS की परिकल्पना से हुआ था तैयार
तत्कालीन खेल आयुक्त राजीव श्रीवास्तव IPS की परिकल्पना से तैयार हुआ था राज्य खेल गीत — IAS अधिकारी डॉ. एस.के. राजू और राजीव श्रीवास्तव ने दी थी आवाज, राजेंद्र पांडेय ‘मित्र’ ने लिखे थे बोल और तन्मय दास ने दिया था संगीत
छत्तीसगढ़ राज्य खेल गीत — 2005
छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास के पन्नों में वर्ष 2005 एक खास अध्याय के रूप में दर्ज है। इसी वर्ष राज्य के खेल विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ का एक राज्य खेल गीत तैयार कर आधिकारिक रूप से लोकार्पित किया गया था। इस ऐतिहासिक गीत का लोकार्पण वर्ष 2005 में आयोजित राज्य खेल अलंकरण समारोह के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा किया गया था।
इस राज्य खेल गीत की परिकल्पना, निर्माण और निर्देशन तत्कालीन खेल आयुक्त राजीव श्रीवास्तव, IPS ने किया था। गीत को आवाज दी थी तत्कालीन कलेक्टर कांकेर डॉ. एस.के. राजू, IAS और तत्कालीन खेल आयुक्त छत्तीसगढ़ राजीव श्रीवास्तव, IPS ने।
गीत के रचनाकार श्री राजेंद्र पांडेय ‘मित्र’ थे, जबकि इसका संगीत श्री तन्मय दास ने तैयार किया था।
2005 से 2007 तक खेल आयोजनों में गूंजता रहा यह गीत
राज्य खेल गीत वर्ष 2005-06 से 2007 तक छत्तीसगढ़ में आयोजित विभिन्न खेल आयोजनों, प्रतियोगिताओं और खेल कार्यक्रमों में नियमित रूप से प्रसारित किया जाता रहा। यह केवल एक गीत नहीं था, बल्कि उस दौर में प्रदेश के खिलाड़ियों और खेल जगत के बीच छत्तीसगढ़ की खेल भावना, पहचान और गौरव का स्वर बनकर सामने आया था।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस गीत को शासन की स्वीकृति के बाद तत्कालीन खेल सचिव श्री एम.एस. मूर्ति एवं तत्कालीन खेल मंत्री श्री हेमचंद यादव की अनुमति से आधिकारिक रूप से जारी किया गया था।
18 साल बाद भी सुरक्षित है उस दौर की मूल आवाज
इस ऐतिहासिक राज्य खेल गीत की वर्ष 2005 की मूल ऑडियो रिकॉर्डिंग आज भी सुरक्षित है। इसके साथ उस समय जारी की गई पुरानी मूल सीडी का कवर भी उपलब्ध है, जो इस गीत के आधिकारिक स्वरूप और उस दौर की खेल गतिविधियों का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा सकता है।
अब उसी वर्ष 2005 में तैयार की गई मूल ऑडियो रिकॉर्डिंग का उपयोग करते हुए, राजीव श्रीवास्तव IPS (सेवानिवृत्त) ने अपनी ओर से कुछ वीडियो संपादन कर इसका नया वीडियो तैयार किया है। यह वीडियो किसी नए आधिकारिक संस्करण के रूप में नहीं, बल्कि अवलोकन, स्मृति और ऐतिहासिक संदर्भ के लिए प्रस्तुत किया गया है।
खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों के लिए एक अनमोल विरासत
छत्तीसगढ़ का यह राज्य खेल गीत प्रदेश के खेल इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण और स्मरणीय दस्तावेज है। आज जब छत्तीसगढ़ अपने खेल जगत में नई पहचान बना रहा है, ऐसे में करीब दो दशक पुराने इस गीत को फिर सामने लाना उस दौर की खेल यात्रा और उससे जुड़ी यादों को जीवंत करने जैसा है।
यह गीत उस समय की सोच, उत्साह और छत्तीसगढ़ में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में किए गए प्रयासों की एक ऐतिहासिक धरोहर है।
उचित समझें तो इस ऐतिहासिक राज्य खेल गीत को खिलाड़ी समुदाय, खेल संघों, खेल प्रेमियों और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों तक पहुंचाने की कृपा करें, ताकि छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास का यह महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित भी रहे और आने वाली पीढ़ियां भी इससे परिचित हो सकें।
— राजीव श्रीवास्तव, IPS (सेवानिवृत्त)




