छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: आबकारी आयुक्त निरंजन दास की हाईकोर्ट से जमानत खारिज; सह-आरोपी दीपेन्द्र चावड़ा को राहत

बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-बहुचर्चित छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने आबकारी आयुक्त निरंजन दास को बड़ा झटका देते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। वहीं, इसी मामले के एक अन्य आरोपी दीपेन्द्र चावड़ा को अदालत से जमानत मिल गई है।
बताया गया कि आबकारी आयुक्त निरंजन दास ने राज्य शासन और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में जमानत के लिए आवेदन लगाया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दास के वकील ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच पूरी करने के लिए निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद 19 दिसंबर 2025 को प्रवर्तन निदेशालय ने मौजूदा ईसीआईआर में उन्हें गिरफ्तार किया था।
बचाव पक्ष का कहना था कि गिरफ्तारी उस समय की गई जब दास पहले से ही संबंधित अपराध की एफआईआर में न्यायिक हिरासत में थे और रायपुर स्थित विशेष न्यायालय (पीसी एक्ट) से गिरफ्तारी की अनुमति भी नहीं ली गई थी। यह भी तर्क दिया गया कि गिरफ्तारी किसी आवश्यक जांच के उद्देश्य से नहीं की गई, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच के लिए निर्धारित समय समाप्त होने के बाद की गई।
दलीलों के अनुसार, गिरफ्तारी के सात दिनों के भीतर प्रवर्तन निदेशालय ने 26 दिसंबर 2025 को पांचवीं सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की, जिसमें निरंजन दास को आरोपी बनाया गया। तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप छत्तीसगढ़ की कथित शराब नीति और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कामकाज से जुड़े हैं, जबकि उस कॉर्पोरेशन के संचालन में उनका कोई प्रत्यक्ष रोल नहीं था। साथ ही, वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की विभागीय जांच में भी इन लेनदेन में किसी प्रकार की अवैधता सामने नहीं आई है।
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश अधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडेय ने दलील दी कि इस मामले में तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी जमानत नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि निरंजन दास पूरे राज्य के आबकारी महकमे के शीर्ष अधिकारी थे, इसके बावजूद उन्होंने कथित अनियमितताओं को रोकने या आवश्यक कार्रवाई करने का कोई प्रयास नहीं किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने निरंजन दास के दोनों जमानत आवेदन खारिज कर दिए। वहीं, सह-आरोपी दीपेन्द्र चावड़ा को अदालत ने राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली।
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