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नवागांव का गुरुवार बाजार बना बदहाली की तस्वीर, कीचड़ में सिमटी ग्रामीणों की खरीदारी; चुनावी वादे भी सवालों के घेरे में

जी. पी. एम. (छत्तीसगढ़ उजाला)-एक ओर शासन-प्रशासन स्वच्छता का संदेश देकर लोगों को साफ-सुथरे वातावरण में रहने के लिए जागरूक कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जीपीएम जिले के पेंड्रा जनपद क्षेत्र के ग्राम नवागांव में शासन-प्रशासन की नाक के नीचे साप्ताहिक बाजार बदहाली का शिकार है। दशकों पुराना गुरुवार बाजार आज भी बारिश के दिनों में कीचड़, जलभराव और अव्यवस्था के बीच संचालित हो रहा है। बाजार की यह तस्वीर केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर ही सवाल नहीं उठाती, बल्कि जनप्रतिनिधियों के पुराने चुनावी वादों की भी याद दिलाती है।

नवागांव में गुरुवार बाजार लगने की परंपरा कई दशकों पुरानी है। हर गुरुवार आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं, वहीं दुकानदार भी अपनी दुकानें लेकर आते हैं। बाजार में दुकान लगाने वाले व्यवसायियों से टैक्स की वसूली भी की जाती है, लेकिन इसके बावजूद बाजार परिसर में साफ-सफाई, जल निकासी और मूलभूत सुविधाओं का हाल बेहद खराब नजर आता है।

बारिश होते ही कीचड़ में तब्दील हो जाता है बाजार

बारिश के बाद बाजार परिसर में जगह-जगह पानी और कीचड़ जमा हो जाता है। लोगों को बाजार में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए कीचड़ के बीच से गुजरना पड़ता है। सब्जी और रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने आने वाले ग्रामीणों को भारी परेशानी होती है। फिसलन के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के गिरने का खतरा भी बना रहता है।

दुकानदारों की परेशानी भी कम नहीं है। कीचड़ और पानी के बीच दुकान लगाना और ग्राहकों तक सामान पहुंचाना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। सवाल यह है कि जब बाजार से नियमित रूप से टैक्स की वसूली की जाती है, तो फिर बाजार परिसर की बुनियादी व्यवस्था सुधारने पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा?

आज की नहीं, वर्षों पुरानी है समस्या

स्थानीय लोगों के मुताबिक नवागांव के गुरुवार बाजार की यह बदहाल तस्वीर आज की नहीं है। वर्षों से बाजार इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहा है। बारिश आते ही कीचड़ और जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत को विभिन्न मदों के माध्यम से विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध होती है। इसके बावजूद बाजार जैसी सार्वजनिक और वर्षों पुरानी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

चुनाव से पहले वादे, जीत के बाद गांव से दूरी?

ग्रामीणों के बीच वर्तमान विधायक को लेकर भी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि चुनाव से पहले विधायक कई बार नवागांव पहुंचे थे। उस दौरान ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं और विकास को लेकर कई बड़े-बड़े वादे किए गए थे। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वही जनप्रतिनिधि इन समस्याओं को देखने के लिए दोबारा नहीं पहुंचे—ऐसी शिकायत ग्रामीण कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि विधायक नवागांव में किसी कार्यक्रम में अतिथि के रूप में जरूर पहुंचते हैं और कार्यक्रम खत्म होने के बाद लौट जाते हैं, लेकिन गांव की जमीनी समस्याओं की सुध लेने के लिए समय नहीं निकलता। लोगों का सवाल है कि चुनाव के समय किए गए वादों का हिसाब आखिर कब होगा?

ग्रामीणों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि जनप्रतिनिधि महंगी और लग्जरी गाड़ियों से क्षेत्र का दौरा करते हैं, लेकिन जिन रास्तों और बाजारों से आम ग्रामीण रोजाना गुजरते हैं, उनकी बदहाली पर नजर क्यों नहीं पड़ती?

आसपास कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान, फिर भी बाजार बदहाल

नवागांव में हाई स्कूल, शासकीय स्वास्थ्य केंद्र, पोस्ट ऑफिस सहित कई महत्वपूर्ण शासकीय सुविधाएं संचालित हैं। ऐसे स्थान पर वर्षों पुराने साप्ताहिक बाजार की यह स्थिति प्रशासनिक निगरानी और स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और ग्राम पंचायत से मांग की है कि बाजार परिसर में तत्काल मिट्टी-मुरुम डालकर आवागमन योग्य बनाया जाए, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए और नियमित साफ-सफाई कराई जाए। साथ ही बाजार की समस्या का अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान किया जाए, ताकि बारिश के दिनों में दुकानदारों और ग्रामीणों को कीचड़ से होकर गुजरने की मजबूरी न रहे और किसी संभावित दुर्घटना को टाला जा सके।

अब देखना होगा कि वर्षों से चली आ रही नवागांव के गुरुवार बाजार की यह बदहाली कब दूर होती है—और चुनाव के दौरान किए गए वादे सिर्फ भाषणों तक सीमित रहते हैं या जमीन पर भी नजर आते हैं।

प्रशांत गौतम

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