कबीरधाम की 21वीं कलेक्टर तुलिका प्रजापति के सामने सुशासन, विकास और राजनीतिक संतुलन की बड़ी चुनौती
बात बेबाक
चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार)
9425522015
राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण और लंबे समय से सियासी उठापटक के केंद्र में रहने वाले कबीरधाम जिले की 21वीं कलेक्टर के रूप में श्रीमती तुलिका प्रजापति ने जिले की कमान संभाल ली है। उनके सामने न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बड़ा दायित्व है, बल्कि पूर्व कलेक्टरों द्वारा स्थापित सुशासन, जनविश्वास और प्रशासनिक परंपरा को आगे बढ़ाने की भी चुनौती है।
कबीरधाम जैसे संवेदनशील जिले में कलेक्टर की भूमिका महज सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रहती। यहां प्रशासन को विकास के साथ-साथ राजस्व, कानून-व्यवस्था, सामाजिक समरसता और राजनीतिक संतुलन जैसे कई मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजस्व और नजूल से जुड़ी वर्षों से धूल खाती फाइलों, आदिवासियों की भूमि बिक्री की अनुमति, अवैध खनन, अतिक्रमण, भू-माफिया और अन्य प्रशासनिक चुनौतियों पर नई कलेक्टर की नीति क्या होगी? क्या इन मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति प्रभावी रूप से दिखाई देगी या प्रभावशाली राजनीति और रसूख प्रशासनिक निर्णयों पर हावी रहेंगे—इसका जवाब आने वाला समय देगा।
हालांकि आम नागरिकों को नई कलेक्टर से एक और बड़ी उम्मीद है—सालों से कहीं न कहीं थमी दिखाई दे रही विकास की गति को फिर से रफ्तार मिले। जिले के दूरस्थ और अंतिम छोर के गांवों तक शासन की योजनाएं पहुंचें, सरकारी कार्यालयों में आम आदमी की सुनवाई हो और प्रशासनिक व्यवस्था जनता के लिए सहज और भरोसेमंद बने।
तुलिका प्रजापति के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती जनता के शासन-प्रशासन पर विश्वास को और मजबूत करने की होगी। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करना, कुपोषण की चुनौती पर प्रभावी काम करना, युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाना तथा जरूरतमंद परिवारों तक शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में होना चाहिए।
शांति और सामाजिक समरसता भी बड़ी कसौटी
कबीरधाम का अतीत कई संवेदनशील घटनाओं का गवाह रहा है। कामठी जैसे विवाद, लोहारिडीह जैसी घटना, झंडा कांड के बाद उपजे धार्मिक विवाद और जातीय तनाव, कर्फ्यू की परिस्थितियां, धरमपुरा कांड तथा हरमो कांड जैसी घटनाओं ने जिले की सामाजिक और कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी की हैं।
नई कलेक्टर के सामने यह सुनिश्चित करना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रशासन को कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक संवाद, आपसी विश्वास और सामुदायिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में भी लगातार काम करना होगा।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिला
कबीरधाम की राजनीतिक संवेदनशीलता किसी से छिपी नहीं है। यह पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का गृह जिला है। वहीं पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जैसे प्रमुख राजनीतिक चेहरों की राजनीति में भी कबीरधाम का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
ऐसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले में प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना कलेक्टर के लिए आसान काम नहीं होगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच प्रशासन को अपनी निष्पक्ष छवि कायम रखनी होगी।
कलेक्टर की सबसे बड़ी ताकत यही होगी कि आम नागरिक को यह महसूस हो कि प्रशासन किसी राजनीतिक दबाव, व्यक्तिगत प्रभाव या रसूख से नहीं, बल्कि नियम, कानून और जनहित के आधार पर निर्णय ले रहा है।
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे शासन
वास्तविक सुशासन तभी माना जाएगा जब सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई दे। पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक प्रशासनिक सेवाएं सहज, सरल, पारदर्शी और जवाबदेह हों। गरीब, किसान, आदिवासी, महिला, युवा और जरूरतमंद व्यक्ति को अपने अधिकार के लिए दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
नई कलेक्टर के कार्यकाल की सफलता का वास्तविक पैमाना यही होगा कि कुछ वर्षों बाद कबीरधाम का आम नागरिक यह कह सके—
“यह सरकार मेरी है और शासन-प्रशासन मेरे साथ खड़ा है।”
तुलिका प्रजापति के सामने चुनौतियां निश्चित रूप से बड़ी हैं, लेकिन अवसर भी उतना ही बड़ा है। यदि प्रशासनिक दृढ़ता, राजनीतिक निष्पक्षता और जनसंवेदनशीलता के साथ काम हुआ तो कबीरधाम विकास, शांति और सुशासन के नए दौर की ओर बढ़ सकता है।
और अंत में—
स्वयं को त्रस्त करके, सबको तृप्त करना,
इतना आसान नहीं होता, नेतृत्व करना।
#जय_हो
22 अगस्त 2026 | कवर्धा (छत्तीसगढ़)



