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मरवाही वनमंडल मे गोबर खाद घोटाले का ऑडियो वायरल: कमीशन, बंटवारे और दबाव की बातों से मचा हड़कंप


गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)
मरवाही वनमंडल में गोबर खाद खरीदी के नाम पर करीब 14.77 लाख रुपये के कथित घोटाले का मामला अब नया और विस्फोटक मोड़ ले चुका है। इस मामले से जुड़ा एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। ऑडियो में तत्कालीन मरवाही रेंजर रमेश खैरवार और चूहा बहरा वन प्रबंधन समिति के सचिव श्रीकांत के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें गोबर खाद खरीदी में हुए कथित खेल और कमीशन की चर्चा सुनाई दे रही है।
“ऊपर तक पैसा गया” — ऑडियो में कमीशन का बड़ा खेल
वायरल ऑडियो में कथित तौर पर गोबर खाद खरीदी में बड़ी रकम निकालने और उसके बंटवारे की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार बातचीत में करीब 35 प्रतिशत कमीशन और भुगतान की रकम कई स्तरों तक पहुंचाने की चर्चा भी सामने आ रही है, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
DFO के निर्देश पर हुआ पूरा खेल?
मामले में आरोप लगाए जा रहे हैं कि उस समय के DFO रौनक गोयल के निर्देश पर ही गोबर खाद खरीदी के नाम पर आहरण अनुमति जारी की गई थी। इसके बाद कथित रूप से फर्जी नामों से भुगतान और बाउचर तैयार कर लाखों रुपये की राशि निकाल ली गई।
“DFO ने पूरा पैसा खुद रख लिया” — ऑडियो में बड़ा आरोप
वायरल ऑडियो में कथित रूप से यह भी कहा जा रहा है कि घोटाले में DFO को बड़ी रकम दी गई थी, लेकिन वह रकम ऊपर तक नहीं पहुंचाई गई। बातचीत में यह तक कहा जा रहा है कि “DFO ने पूरा पैसा खुद ही रख लिया।” इस कथित बयान के सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है।
CCF स्तर तक पैसों की चर्चा
ऑडियो में कथित तौर पर CCF स्तर तक पैसे पहुंचाने की बात भी कही जा रही है। इसके साथ ही बातचीत में “त्रिपाठी” नाम का जिक्र भी सामने आया है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि संजय त्रिपाठी का प्रभाव स्थानांतरण के बाद भी मरवाही वनमंडल में बना हुआ था।
कर्मचारी को धमकाने का आरोप
वायरल ऑडियो में यह भी दावा किया जा रहा है कि रेंजर रमेश खैरवार द्वारा समिति के सचिव श्रीकांत को बयान देने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। बातचीत में कथित तौर पर कहा जा रहा है कि “बयान सोच-समझकर देना, नहीं तो निलंबन की कार्रवाई हो सकती है।”
बाउचर और आहरण अनुमति पर उठे सवाल
मामले में गोबर खाद खरीदी से जुड़े आहरण अनुमति पत्र और भुगतान के बाउचर भी सामने आने की बात कही जा रही है। यदि यह दस्तावेज जांच में सही पाए जाते हैं तो यह पूरा मामला वन विभाग में बड़े वित्तीय अनियमितता का रूप ले सकता है।
कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वायरल ऑडियो और संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होती है तो वन विभाग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। लोगों के अनुसार यह मामला केवल एक रेंजर या कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
FIR और उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज
मामले को लेकर अब तत्कालीन DFO रौनक गोयल सहित संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर FIR दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग तेज हो गई है। मरवाही वनमंडल का यह कथित गोबर खाद घोटाला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और जांच एजेंसियां इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करती हैं।

प्रशांत गौतम

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