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धान खरीदी में उगाही का आरोप, देवरी कला केंद्र पर बवाल
वायरल वीडियो के बाद भी FIR नहीं, इस्तीफे के बावजूद प्रबंधक की वापसी से प्रशासन कटघरे में


गौरेला–पेंड्रा–मरवाही (छत्तीसगढ़)।
जिले के देवरी कला धान खरीदी केंद्र से जुड़ा कथित अवैध वसूली का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। किसानों से धान खरीदी के दौरान ‘कट’ लेने के आरोप, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, जांच के बाद भी FIR दर्ज न होना और पूर्व प्रबंधक की पुनः पदस्थापना—इन सभी घटनाक्रमों ने प्रशासनिक कार्रवाई और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों का आरोप: हर बोरी पर ‘कट’, नहीं देने पर परेशानी
स्थानीय किसानों का आरोप है कि धान तौल और भुगतान की प्रक्रिया के दौरान उनसे प्रति बोरी या प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि की मांग की जाती थी। किसानों का कहना है कि यदि वे पैसे नहीं देते थे, तो उनकी फसल की तौल में देरी की जाती थी या तकनीकी खामियां निकालकर उन्हें परेशान किया जाता था।
कुछ किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह सिलसिला पूरे खरीदी सीजन के दौरान चलता रहा, हालांकि इस संबंध में दर्ज आधिकारिक शिकायतों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
वायरल वीडियो से खुली परतें
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में धान खरीदी केंद्र परिसर के भीतर एक व्यक्ति किसानों से पैसे लेते साफ नजर आता है। बताया जा रहा है कि यह केंद्र आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, देवरी कला के अंतर्गत संचालित है।
सूत्रों के अनुसार, वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कोटमी निवासी विकास गुप्ता उर्फ विक्की बताया जा रहा है, जिस पर प्रति बोरी ‘कट’ वसूलने का आरोप है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक इस वीडियो या आरोपों को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक नहीं की गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि
खरीदी केंद्र के भीतर बाहरी व्यक्ति की एंट्री कैसे हुई?
क्या यह प्रबंधन की जानकारी के बिना संभव था?
यदि नहीं, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही?
जांच हुई, लेकिन FIR अब भी लंबित
कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार, फूड इंस्पेक्टर और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम ने मामले की जांच की। सूत्रों का दावा है कि प्रारंभिक जांच में अनियमितता के संकेत मिले हैं।
इसके बावजूद अब तक FIR दर्ज न होना किसानों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा और नाराजगी का विषय बना हुआ है। लोगों का सवाल है कि जब वीडियो और जांच दोनों मौजूद हैं, तो कानूनी कार्रवाई में देरी क्यों?
इस्तीफे के बाद फिर पदस्थापना, सवालों में निर्णय
मामले ने तब और गंभीर मोड़ लिया जब यह सामने आया कि वर्ष 2024–25 की धान खरीदी के दौरान तत्कालीन सोसायटी प्रबंधक चंद्रकांत सलाम ने कथित रूप से व्हाट्सएप के माध्यम से कलेक्टर और सहायक पंजीयक को अपना इस्तीफा भेज दिया था।
सूत्रों के मुताबिक, लगभग 9 महीने बाद उन्हें पुनः देवरी कला में ही पदस्थ कर दिया गया। इस फैसले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि जब आरोप पहले से मौजूद थे, तो जांच पूरी होने से पहले पुनः पदस्थापना क्यों की गई?
कार्रवाई दिखावटी तो नहीं?
फड़ प्रभारी सचिन राठौर की सेवा समाप्ति की जानकारी भी सामने आई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि वे अब भी कार्य करते देखे जा रहे हैं। यदि यह सही है, तो यह संदेह और गहराता है कि कहीं कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित तो नहीं है।
किसानों का आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
देवरी कला और आसपास के गांवों के किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों का कहना है—
“धान बेचने आए थे, लेकिन हर बोरी पर कट मांगा जा रहा था। अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो हमें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।”
किसानों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच, FIR दर्ज करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन के सामने अब ये बड़े सवाल
क्या वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच होगी?
FIR दर्ज कर जिम्मेदारों की भूमिका तय की जाएगी या नहीं?
पूर्व प्रबंधक की पुनः पदस्थापना पर प्रशासन क्या जवाब देगा?
क्या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?
धान खरीदी व्यवस्था किसानों की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है। यदि इसी व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन सख्त कदम उठाकर भरोसा बहाल करता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

प्रशांत गौतम

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