मनेंद्रगढ़ में आबकारी विभाग बेबस या मेहरबान? बस्तियों के किराना दुकानों तक धड़ल्ले से बिक रही मध्यप्रदेश की अवैध शराब
अधिकारियों का जवाब— “जानकारी दीजिए, कार्रवाई करेंगे”, लेकिन सवाल यह कि विभाग का खुफिया तंत्र और मैदानी निगरानी आखिर किस काम की?
मनेंद्रगढ़(छत्तीसगढ़ उजाला)-मनेंद्रगढ़ शहर और आसपास के क्षेत्रों में मध्यप्रदेश से लाई जा रही अवैध शराब का कारोबार लगातार फैलता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि बस्तियों के भीतर छोटे-छोटे किराना दुकानों तक में खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही है। इसके बावजूद आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल दावों तक सीमित दिखाई दे रही है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आबकारी विभाग के अधिकारी लगातार अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने और कार्रवाई करने का दावा करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। यदि विभाग की कार्रवाई प्रभावी है, तो आखिर मध्यप्रदेश से अवैध शराब की खेप मनेंद्रगढ़ तक कैसे पहुंच रही है? और यदि विभाग सक्रिय है, तो बस्तियों के किराना दुकानों में यह कारोबार बेखौफ कैसे संचालित हो रहा है?
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई, जब आबकारी विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में चर्चा की गई। अधिकारियों का जवाब था— “जहां अवैध शराब बिक रही हो, उसकी जानकारी दीजिए, हम कार्रवाई करेंगे।” विभाग के इस बयान ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि हर सूचना जनता ही उपलब्ध कराएगी, तो फिर विभाग का खुफिया तंत्र, मैदानी अमला और नियमित निगरानी व्यवस्था आखिर किस काम के लिए है?
क्षेत्र में लंबे समय से चर्चा है कि कई बस्तियों में खुलेआम मध्यप्रदेश की अवैध शराब बेची जा रही है। इसके बावजूद बड़े नेटवर्क तक विभाग के हाथ नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, या फिर अवैध शराब माफिया पर प्रभावी शिकंजा कसने की इच्छाशक्ति का अभाव है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना किसी मजबूत नेटवर्क और संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर अवैध शराब का कारोबार संचालित होना आसान नहीं है। हालांकि इस संबंध में किसी भी प्रकार के संरक्षण के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाए।
अब जनता का सीधा सवाल है कि आखिर अवैध शराब के इस कारोबार का मास्टरमाइंड कौन है? कब तक कार्रवाई के दावे किए जाते रहेंगे और कब बस्तियों में खुलेआम बिक रही अवैध शराब पर प्रभावी रोक लगेगी? लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग केवल शिकायतों का इंतजार करने के बजाय स्वयं व्यापक अभियान चलाकर पूरे नेटवर्क का खुलासा करें और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें। तभी अवैध शराब के इस कारोबार पर वास्तविक अंकुश लग सकेगा और कानून का भय भी दिखाई देगा।




