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शिकायतों के त्वरित निराकरण के दावे, लेकिन मरवाही SSA वित्तीय अनियमितता मामले में कार्रवाई अब तक क्यों नहीं..?

जिला पंचायत सीईओ ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की, लेकिन कार्रवाई अब भी लंबित; पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठ रहे गंभीर सवाल।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)-मरवाही जनपद पंचायत अंतर्गत सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के बजट में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट जिला पंचायत तक पहुंच भी चुकी है, तो आखिर कार्रवाई किस वजह से अटकी हुई है? जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने स्वयं स्वीकार किया है कि “जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, कार्रवाई अभिलंबित (लंबित) है।” इसके बावजूद अब तक किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई ठोस प्रशासनिक कदम सामने नहीं आया है, जिससे लोगों में सवाल और संदेह दोनों बढ़ गए हैं।

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गौरतलब है कि समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों में प्रकाशित तथ्यों के आधार पर जिला पंचायत ने इस गंभीर मामले की जांच के लिए संयुक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति में जिला कोषाधिकारी और जिला अंकेक्षक को सदस्य बनाया गया था। जांच दल को सिर्फ सात कार्य दिवस के भीतर पूरे मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।

जांच समिति को बैंक खातों के लेन-देन, शासकीय राशि के कथित रूप से निजी खातों एवं संस्थानों में हस्तांतरण, संयुक्त हस्ताक्षर प्रणाली के उल्लंघन, वित्तीय नियमों की अनदेखी और अन्य संबंधित बिंदुओं की गहन जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। अब जब जिला पंचायत खुद यह स्वीकार कर चुका है कि रिपोर्ट उसके पास पहुंच चुकी है, तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या जांच में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है? यदि हुई है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, और यदि आरोप निराधार पाए गए हैं तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन-प्रशासन की पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन की भी परीक्षा बन गया है। जांच पूरी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट आने के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तो जांच प्रक्रिया का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाएगा।

अब जिले की जनता की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि कार्रवाई आखिर किस स्तर पर अटकी हुई है? क्या रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय लंबित है, या फिर किसी प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रिया के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है? जब तक प्रशासन इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं देता, तब तक इस मामले को लेकर उठ रहे संदेह और चर्चाओं पर विराम लगना मुश्किल दिखाई देता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है— जांच पूरी, रिपोर्ट भी पहुंच गई… तो दोषियों की जवाबदेही कब तय होगी और कार्रवाई आखिर कब होगी?

प्रशांत गौतम

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