जिला पंचायत भवन के 3 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी के आरोप, RES के EE बाबूलाल सिहासरे का तबादला; कांग्रेस जिला महामंत्री ने जल्द रिलीव करने की मांग की
पेंड्रा। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जिला पंचायत भवन निर्माण के लिए जारी 3 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ठेका आवंटित किए जाने के आरोपों के बीच RES संभाग मरवाही के कार्यपालन अभियंता (EE) बाबूलाल सिहासरे का तबादला हो गया है। कांग्रेस जिला महामंत्री पवन केशरवानी ने इसे टेंडर प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ी पर कार्रवाई से जोड़ते हुए कलेक्टर से शासन के आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारी को जल्द से जल्द जिले से रिलीव करने का अनुरोध किया है।
कांग्रेस जिला महामंत्री पवन केशरवानी का आरोप है कि जिला पंचायत भवन निर्माण के लिए करीब 3 करोड़ रुपये की लागत वाले टेंडर में RES संभाग मरवाही के EE बाबूलाल सिहासरे और टेंडर समिति से जुड़े जीशान काजी एवं सागर पात्रे की भूमिका पर सवाल उठे हैं। आरोप के मुताबिक, फर्जी कागजात के आधार पर ठेकेदार हितेश सूर्यवाणी को 3 करोड़ रुपये का टेंडर आवंटित कर दिया गया था।
शिकायत के बाद पहली निविदा हुई निरस्त
बताया गया है कि इस टेंडर को लेकर ठेकेदार श्री जी कंस्ट्रक्शन की ओर से शिकायत की गई। शिकायत के बाद मामले में अधीक्षण अभियंता के निर्देश पर कार्रवाई हुई और पहले जारी किए गए टेंडर को निरस्त कर दिया गया।
इसके बाद जिला पंचायत भवन निर्माण के लिए दोबारा निविदा आमंत्रित की गई। लेकिन दूसरी निविदा प्रक्रिया भी विवादों से बच नहीं सकी। कांग्रेस नेता केशरवानी का आरोप है कि दूसरी बार भी गलत शपथ पत्र और गलत सत्यनिष्ठा संधि पत्र प्रस्तुत किए जाने के बावजूद 3 करोड़ रुपये की राशि वाले जिला पंचायत भवन निर्माण का ठेका बालाजी होम्स को दे दिया गया।
दूसरी निविदा पर भी उठे सवाल
दूसरी बार ठेका आवंटित किए जाने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। श्री जी कंस्ट्रक्शन द्वारा टेंडर निरस्त करने की मांग को लेकर न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया गया है। पवन केशरवानी के अनुसार, ठेकेदार ने इस मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट में अपील की है और जल्द ही इस मामले में निर्णय आने की संभावना है।
तबादले के बाद रिलीविंग की मांग
इसी बीच RES संभाग मरवाही के EE बाबूलाल सिहासरे का तबादला हो गया है। कांग्रेस जिला महामंत्री पवन केशरवानी ने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि छत्तीसगढ़ शासन के तबादला आदेश का पालन करते हुए संबंधित अधिकारी को बिना विलंब जिले से रिलीव किया जाए।

केशरवानी का कहना है कि जिला पंचायत भवन जैसे महत्वपूर्ण शासकीय निर्माण कार्य में करोड़ों रुपये की राशि जुड़ी हुई है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया में उठे सवालों की निष्पक्ष जांच और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
अब इस पूरे मामले में निगाहें सुप्रीम कोर्ट में चल रही प्रक्रिया और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह भी है कि पहली निविदा निरस्त होने के बाद दूसरी निविदा में कथित गलत शपथ पत्र एवं सत्यनिष्ठा संधि पत्र के आरोपों के बावजूद ठेका किस आधार पर बालाजी होम्स को दिया गया।






