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फुंडहर गोठान में क्षमता से दोगुने से ज्यादा मवेशी, 8 गायों की मौत के दावे से मचा हड़कंप; चारा-पानी और इलाज की व्यवस्था पर उठे सवाल

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-राजधानी रायपुर के फुंडहर गोठान में क्षमता से दोगुने से ज्यादा मवेशियों को रखे जाने और लगातार गायों की मौत के दावों ने गोठान की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, करीब 260 गायों की क्षमता वाले गोठान में 600 से ज्यादा मवेशी रखे गए हैं। वहीं नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने गोठान का निरीक्षण करने के बाद परिसर में 8 गायों के मृत मिलने का दावा किया है।

गोठान में बड़ी संख्या में मवेशियों की मौजूदगी के बीच चारा, पानी, साफ-सफाई और पशुओं के इलाज की व्यवस्था दबाव में नजर आ रही है। निरीक्षण के दौरान परिसर में मृत मवेशी मिलने की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

260 की क्षमता, 600 से ज्यादा मवेशी

फुंडहर गोठान की क्षमता करीब 260 मवेशियों की बताई जा रही है, लेकिन वर्तमान में यहां 600 से अधिक गायें रखे जाने की जानकारी सामने आई है। यानी गोठान में उसकी निर्धारित क्षमता से दोगुने से भी ज्यादा मवेशी मौजूद हैं।

चार शेड में इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों को रखने से पर्याप्त जगह, स्वच्छता, चारा और पानी उपलब्ध कराने में परेशानी होने की आशंका जताई जा रही है। बीमार या घायल पशुओं की अलग से देखभाल और उपचार की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

निरीक्षण में मृत गायें मिलने का दावा

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने गोठान का निरीक्षण किया। उन्होंने दावा किया कि निरीक्षण के दौरान परिसर में 8 गायें मृत अवस्था में मिलीं। उनके मुताबिक, गोठान में मवेशियों की स्थिति चिंताजनक है और व्यवस्थाओं को लेकर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

वहीं रिपोर्ट में पिछले कुछ दिनों के दौरान कई मवेशियों की मौत होने की बात भी सामने आई है। पिछले 10 दिनों में 60 से ज्यादा गायों की मौत के दावे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। नगर निगम की ओर से कम संख्या में मौत होने की बात कही गई है, जबकि विपक्ष और स्थानीय स्तर पर इससे अधिक मौतों का दावा किया जा रहा है।

चारा कितना, मवेशी कितने?

गोठान में चार शेड हैं और इन्हीं में बड़ी संख्या में मवेशियों को रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान करीब 15 पैकेट बेगान और 7 बोरी खली रखी मिली। अब सवाल यह है कि 600 से अधिक मवेशियों के लिए यह चारा कितने समय के लिए पर्याप्त है और उन्हें नियमित रूप से पर्याप्त पोषण मिल रहा है या नहीं।

क्षमता से कहीं अधिक मवेशियों की मौजूदगी के कारण चारे की मांग भी कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में नियमित और पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध कराना गोठान प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।

पानी और इलाज की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

गोठान में सिर्फ चारे की स्थिति ही नहीं, बल्कि पानी और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों के लिए पर्याप्त स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना और बीमार पशुओं को समय पर उपचार देना जरूरी है।

यदि कोई मवेशी बीमार या घायल होता है तो उसके लिए तत्काल चिकित्सा, दवा और अलग देखभाल की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह भी जांच का विषय बन गया है। लगातार मवेशियों की मौत के दावों के बाद पशु चिकित्सा व्यवस्था की समीक्षा की मांग भी उठ रही है।

पहले भी उठ चुके हैं व्यवस्थाओं पर सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, गोठान की व्यवस्थाओं और मवेशियों की मौत को लेकर पहले भी निरीक्षण किया जा चुका है। उस दौरान अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद यदि अब भी क्षमता से दोगुने से ज्यादा मवेशी रखे जा रहे हैं और मृत गायें परिसर में मिल रही हैं, तो पहले दिए गए निर्देशों के पालन पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

25.83 लाख रुपये के भुगतान का मामला भी चर्चा में

गोठान से जुड़े खर्च और भुगतान का मामला भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सालभर के लिए करीब 25.83 लाख रुपये का भुगतान किया जाना है, लेकिन यह भुगतान लगभग 11 महीने से लंबित बताया जा रहा है।

ऐसे में सवाल यह भी है कि भुगतान लंबित रहने का असर चारा, पशुओं की देखभाल, साफ-सफाई और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं पर कितना पड़ा है। गोठान संचालन से जुड़े भुगतान और खर्च की स्थिति भी अब जांच के दायरे में आ गई है।

फुंडहर गोठान में क्षमता से अधिक मवेशियों की मौजूदगी, चारे-पानी की व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं और लगातार मवेशियों की मौत के दावों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गोठान की क्षमता 260 मवेशियों की है, तो 600 से अधिक मवेशियों को वहां रखने की स्थिति क्यों बनी?

मवेशियों की मौत की वास्तविक संख्या, मौत के कारण, उपलब्ध चारे की मात्रा, पानी की व्यवस्था, पशु चिकित्सा सुविधा और लंबित भुगतान की पूरी स्थिति की जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी। फिलहाल फुंडहर गोठान का मामला नगर निगम की व्यवस्थाओं और पशु संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

प्रशांत गौतम

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