*दूसरों को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई लड़ने वाला पत्रकार अपनी बेटी के लिए भटक रहा दर-दर, अब एसपी का सम्मान लौटाकर पूछेंगे बड़ा सवाल,* *अनिल तंबोली का ऐलान—15 अगस्त को मुख्य समारोह में लौटाऊंगा प्रशस्ति पत्र, कहा- सम्मान देने में गलती हुई या थाना प्रभारी चुनने में?*
छत्तीसगढ़ उजाला

सक्ती (छत्तीसगढ़ उजाला)। सक्ती के वरिष्ठ पत्रकार एवं वेब मिडिया के संपादक अनिल तंबोली ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रफ्फुल कुमार ठाकुर द्वारा उन्हें प्रदान किए गए प्रशस्ति पत्र को वापस लौटाने का निर्णय लिया है। तंबोली का कहना है कि उनकी बेटी से जुड़े कथित दहेज एवं मानसिक उत्पीड़न के मामले में पुलिस कार्रवाई नहीं होने से वह बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा है कि वह 15 अगस्त को मुख्य समारोह में सम्मान वापस करेंगे।
अनिल तंबोली के अनुसार उनकी बेटी ने 29 मई 2026 को सक्ती थाने में दहेज एवं मानसिक उत्पीड़न को लेकर शिकायत दी थी। इसके बाद मामले की काउंसलिंग 27 जून 2026 को परिवार परामर्श केंद्र, सक्ती में हुई। तंबोली का दावा है कि काउंसलिंग के दौरान पति-पत्नी के बीच सहमति नहीं बन सकी और उन्हें आगे थाने में जाने की सलाह दी गई।
तंबोली के मुताबिक, 29 जून 2026 को परिवार परामर्श केंद्र से बयान की प्रति सक्ती थाने भेज दी गई थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद अब तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उनका कहना है कि शिकायत को दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
‘जब बेटी की बारी आई तो खुद थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं’
वरिष्ठ पत्रकार अनिल तंबोली ने साथी पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह करीब 25 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं और इस दौरान उन्होंने अनेक लोगों की समस्याओं को उठाकर उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास किया। लेकिन जब उनकी अपनी बेटी का मामला सामने आया तो उन्हें थाने, एसडीओपी और एसपी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
तंबोली का कहना है कि ऐसी स्थिति ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी पुलिस अधिकारी से व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन उनके मन में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल जरूर हैं।
एसपी से दो सवाल, सम्मान लौटाने का फैसला
अनिल तंबोली ने पुलिस अधीक्षक प्रफ्फुल कुमार ठाकुर से सवाल करते हुए कहा कि यदि एक पत्रकार की बेटी के मामले में भी उसे न्याय के लिए पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो फिर पुलिस द्वारा पत्रकारिता के क्षेत्र में दिए गए सम्मान का औचित्य क्या है।

उन्होंने कहा कि संभव है कि पुलिस अधीक्षक ने सम्मान के लिए गलत व्यक्ति का चयन कर लिया हो या फिर सक्ती थाना प्रभारी के रूप में गलत अधिकारी को अपनी पहली पसंद बनाया हो। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से इस पूरे मामले पर आत्ममंथन करने की अपील की है।
15 अगस्त को मुख्य समारोह में लौटाएंगे प्रशस्ति पत्र
तंबोली ने घोषणा की है कि वह 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में सम्मानीय मुख्य अतिथि के समक्ष पुलिस अधीक्षक प्रफ्फुल कुमार ठाकुर द्वारा प्रदान किया गया प्रशस्ति पत्र वापस करेंगे।
उनका कहना है कि यह निर्णय किसी व्यक्तिगत विवाद या किसी पुलिस अधिकारी के प्रति व्यक्तिगत दुर्भावना के कारण नहीं, बल्कि अपनी बेटी के मामले में अपेक्षित पुलिस कार्रवाई नहीं होने से उपजे आक्रोश और निराशा के कारण लिया गया है।
अब पुलिस की कार्रवाई पर टिकी नजर
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि 29 मई को दी गई शिकायत, 27 जून की काउंसलिंग और 29 जून को थाना भेजे गए कथित बयान के बाद पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है? क्या शिकायत की जांच पूरी हुई, क्या एफआईआर दर्ज नहीं करने का कोई वैधानिक कारण है और मामले की वर्तमान स्थिति क्या है—इन सवालों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है।
समाचार प्रकाशित किए जाने तक पुलिस अधीक्षक या सक्ती थाना प्रभारी का इस पूरे मामले पर आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है। पुलिस का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक परिवार की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला संबंधी शिकायतों पर पुलिस की संवेदनशीलता, शिकायतों की जांच और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े करता है।




