छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, PHQ ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा अतिरिक्त प्रभार
स्थानांतरण क़े बाद रिक्त हुए पदों पर अस्थायी व्यवस्था, नियमित नियुक्ति तक संभालेंगे अतिरिक्त जिम्मेदारी
रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने पुलिस विभाग और छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (छसबल) की विभिन्न इकाइयों में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम के निर्देश पर जारी आदेश के तहत यह व्यवस्था नियमित पदस्थापना होने तक प्रभावी रहेगी।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, गृह (पुलिस) विभाग द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश के बाद कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हो गए थे। इनमें IPS श्वेता राजमणी (2012 बैच), राजेश कुकरेजा (2014 बैच) और त्रिलोक बंसल (2016 बैच) के स्थानांतरण के बाद संबंधित पदों पर अभी तक नई नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। ऐसे में विभागीय कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन अधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभार
आदेश के अनुसार, गायत्री सिंह (रापुसे), सेनानी, 7वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, भिलाई को प्रथम वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, भिलाई का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे अपने वर्तमान दायित्वों के साथ प्रथम वाहिनी का संचालन भी करेंगी।

वहीं, IPS शंकरलाल बघेल, उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ सेनानी, CTJW कांकेर, को एक साथ तीन महत्वपूर्ण इकाइयों की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें 5वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, जगदलपुर, 15वीं वाहिनी (भा./र.) छसबल, बीजापुर तथा 19वीं वाहिनी (भा./र.) छसबल, करणपुर (जगदलपुर) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
इसके अलावा IPS आकाश कुमार शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ बघेरा-दुर्ग को पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ बघेरा-दुर्ग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वे अब एसटीएफ से जुड़े प्रशासनिक एवं संचालन संबंधी कार्यों की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
नियमित नियुक्ति तक रहेगी व्यवस्था
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है और संबंधित पदों पर शासन द्वारा नियमित नियुक्ति किए जाने तक लागू रहेगी। नई पदस्थापनाओं के बाद अतिरिक्त प्रभार स्वतः समाप्त कर दिया जाएगा।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नहीं रुकेगा कामकाज
पुलिस विभाग का कहना है कि छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की कई बटालियनें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं और सुरक्षा अभियानों में उनकी भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार का व्यवधान न आए, इसलिए समय रहते वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर कामकाज की निरंतरता सुनिश्चित की गई है।



