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जगन्नाथ रथ यात्रा 2026, चिरमिरी: सेवा और संस्कार के माध्यम से अभाविप ने निभाया सामाजिक दायित्व

चिरमिरी। भगवान श्रीजगन्नाथ की पावन रथ यात्रा 2026 श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के वातावरण में भव्य रूप से संपन्न हुई। इस अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के कार्यकर्ताओं ने सेवा, संस्कार और सामाजिक समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विभिन्न सेवा कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाई। परिषद के कार्यकर्ताओं ने पूरे आयोजन के दौरान निस्वार्थ भाव से श्रद्धालुओं की सेवा कर भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया।

रथ यात्रा के दौरान अभाविप कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल एवं प्रसाद वितरण, भीड़ प्रबंधन, यात्रा मार्ग पर आवश्यक सहयोग, स्वच्छता व्यवस्था तथा अन्य सेवा गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यकर्ताओं ने अनुशासन, संयम और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए यह संदेश दिया कि सेवा ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन प्रत्येक युवा का कर्तव्य है।

भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और लोककल्याण का प्रतीक है। यह महापर्व समाज के प्रत्येक वर्ग को एक सूत्र में जोड़ते हुए प्रेम, सहयोग, समानता और सेवा का संदेश देता है। अभाविप का मानना है कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी न केवल उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है, बल्कि उनमें राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध, सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा की भावना को भी सुदृढ़ करती है।

अभाविप अपने स्थापना काल से ही “ज्ञान-शील-एकता” के आदर्शों को आत्मसात करते हुए विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण, सामाजिक चेतना और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का कार्य करती रही है। परिषद का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक के रूप में तैयार करना भी है। इसी उद्देश्य से परिषद समय-समय पर सेवा, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, आपदा राहत, सामाजिक जागरूकता तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती रही है।

रथ यात्रा के अवसर पर किए गए सेवा कार्यों के माध्यम से अभाविप ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति का वास्तविक स्वरूप केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, सहयोग, संवेदना और समरसता के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना ही उसका मूल उद्देश्य है। जब युवा अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाजहित में कार्य करते हैं, तभी राष्ट्र निर्माण की भावना साकार होती है।

अभाविप ने सभी श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सहभागिता और सामूहिक प्रयासों से ही ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन सफल होते हैं। परिषद ने यह भी संकल्प व्यक्त किया कि भविष्य में भी वह “छात्र शक्ति – राष्ट्र शक्ति” के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए सेवा, संस्कार और संगठन के माध्यम से समाजहित एवं राष्ट्रहित के कार्यों में निरंतर सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी तथा युवाओं को भारतीय संस्कृति, सामाजिक दायित्व और राष्ट्र निर्माण के कार्यों से जोड़ने का अभियान सतत जारी रखेगी।

प्रशांत गौतम

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