*छत्तीसगढ़ में नया किराया कानून अब हुआ लागू, मकान मालिक और किरायेदार के विवाद होंगे खत्म* *अब संपत्ति प्रबंधकों को मिली कानूनी मान्यता अधिकार*
छत्तीसगढ़ उजाला

रायपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने बुधवार को ‘छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पारित कर प्रदेश में किराये से जुड़े सुधारों का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा पेश इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य भवन स्वामी और किरायेदार के बीच संबंधों को पारदर्शी, संतुलित और न्यायसंगत बनाना है।
यह नया कानून केंद्र सरकार के ‘आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021’ के अनुरूप तैयार किया गया है। अब भाड़ा नियंत्रण अधिकरण को सिविल न्यायालय के समान शक्तियां प्राप्त होंगी। विधेयक में अनावश्यक स्थगनों पर रोक लगाते हुए मकान मालिक और किरायेदारों के बीच के विवादों का निराकरण 60 दिनों के भीतर करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, यदि भवन स्वामी किराया लेने से इनकार करता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत किराया जमा करने का विकल्प किरायेदार के पास सुरक्षित रहेगा।
उत्तराधिकारी और संपत्ति प्रबंधकों की भूमिका
कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि किरायेदारी अनुबंध केवल मूल पक्षकारों तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनकी मृत्यु या अन्य परिस्थितियों में ये कानूनी उत्तराधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होंगे। इसके साथ ही, प्रदेश में पहली बार संपत्ति प्रबंधकों की भूमिका को कानूनी मान्यता दी गई है। उनके अधिकार, दायित्व और गलत आचरण पर कार्रवाई के स्पष्ट प्रावधान तय किए गए हैं, जिससे किरायेदारी प्रबंधन और अधिक पेशेवर हो सकेगा।
हाउसिंग सेक्टर के लिए गेम चेंजर
यह संशोधन छत्तीसगढ़ के शहरी विकास और हाउसिंग सेक्टर के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। पुराना किराया कानून कई मायनों में जटिल और धीमा था, जिसके कारण अदालतों में सालों तक केस लंबित रहते थे। 60 दिन की समय-सीमा का प्रावधान न्याय प्रक्रिया में तेजी लाएगा। प्रापर्टी मैनेजर को कानूनी मान्यता देना एक आधुनिक कदम है, जो विशेष रूप से रायपुर, भिलाई और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में हाउसिंग मार्केट को व्यवस्थित करेगा। यह कानून न केवल विवाद कम करेगा, बल्कि निवेशकों और मकान मालिकों के बीच विश्वास बढ़ाकर राज्य में किराये के मकानों की उपलब्धता में भी वृद्धि करेगा।




