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गुप्त नवरात्रि में रायपुर के आमानाका स्थित सिद्धपीठ माँ दक्षिण काली मंदिर में दिव्य चमत्कार! अखंड ज्योत की लौ में दिखा माँ महाकाली का स्वरूप, दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर के आमानाका स्थित सिद्धपीठ माँ दक्षिण काली मंदिर में सोमवार को एक अद्भुत और आस्था से जुड़ा दृश्य देखने को मिला। गुप्त नवरात्रि के द्वितीय दिवस मंदिर में प्रज्वलित अखंड ज्योत की लौ में माँ महाकाली का दिव्य स्वरूप दिखाई देने का दावा किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। देखते ही देखते पूरा मंदिर परिसर “जय माँ जगतजननी” और “जय माँ महाकाली” के जयघोष से गूंज उठा।

मंदिर में स्थापित मिट्टी के कलश पर प्रज्ज्वलित अखंड दीपक, जिसके नीचे त्रिशूल अंकित है और चारों ओर आम के पत्ते रखे गए हैं, उसकी लौ में भक्तों ने माँ के नेत्रों जैसी दिव्य आभा का अनुभव किया। इस अलौकिक दृश्य की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे और माँ के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानने लगे।

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना, शक्ति उपासना और माँ की गुप्त शक्तियों की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में माँ की दस महाविद्याओं की विशेष पूजा की जाती है। नवरात्रि के द्वितीय दिवस माँ ब्रह्मचारिणी एवं माँ काली की विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में श्रद्धा और भक्ति से की गई साधना का फल शीघ्र प्राप्त होता है तथा माँ अपने भक्तों के सभी कष्ट, भय और नकारात्मकता का नाश करती हैं।

सुबह की मंगल आरती के बाद से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने अखंड ज्योत के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि पूरे नौ दिनों तक मंदिर में विशेष पूजन, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी प्रतिदिन शाम की महाआरती के पश्चात भक्तों के बीच भोग-प्रसाद का वितरण किया जा रहा है।

मंदिर समिति का कहना है कि सोमवार को अखंड ज्योत में दिखाई दिया यह अद्भुत स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का विषय बन गया है। बड़ी संख्या में लोग इस दिव्य दृश्य के दर्शन करने मंदिर पहुंच रहे हैं।

विशेष बात यह है कि सिद्धपीठ माँ दक्षिण काली मंदिर में माँ बाल स्वरूप में विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्वरूप में माँ अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और विश्वास से की गई प्रार्थना को शीघ्र स्वीकार करती हैं तथा उनकी मनोकामनाएं जल्द पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

इसे माँ का दिव्य आशीर्वाद और चमत्कार मानते हुए बड़ी श्रद्धा के साथ दर्शन कर रहे हैं। गुप्त नवरात्रि के इस अलौकिक दृश्य ने एक बार फिर मंदिर की धार्मिक महत्ता और भक्तों की अटूट आस्था को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया।

प्रशांत गौतम

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