
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़ उजाला)। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से पुलिस विभाग की गंभीर लापरवाही और अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। सोमनी थाना में एक नाबालिग बालिका और उसके परिजनों को पूरी रात थाने में बैठाकर रखने तथा उनके साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप में एसपी ने सख्त कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी और महिला हेड कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
❗ गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर नाबालिग को बताया गर्भवती
जानकारी के अनुसार, मामला सोमनी थाना क्षेत्र का है, जहां थाना प्रभारी अरुण नामदेव ने कथित तौर पर गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर एक नाबालिग बालिका को गर्भवती घोषित कर दिया। इसके बाद बालिका और उसके परिवार को रातभर थाने में बैठाकर रखा गया। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और नाबालिग के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
👮♀️ महिला हेड कांस्टेबल पर भी गंभीर आरोप
मामले में ड्यूटी पर तैनात महिला प्रधान आरक्षक राजश्री सिंह पर भी नाबालिग बालिका से अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। बताया जा रहा है कि एसपी स्वयं मौके पर पहुंचीं और पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
⚖️ एसपी की सख्त कार्रवाई – दोनों निलंबित
एसपी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, थाना प्रभारी अरुण नामदेव और महिला प्रधान आरक्षक राजश्री सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र भेज दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान दोनों को बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
❓ पुलिस कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और संवेदनशील मामलों में व्यवहार को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर नाबालिग से जुड़े मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पुलिस की छवि को प्रभावित करती हैं और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
🔍 जांच जारी
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इस घटना के बाद जिले में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर चर्चा तेज हो गई है।




