जीपीएम स्वास्थ्य विभाग में आदेशों की खुली अवहेलना: शासन सख्त, लेकिन अटैचमेंट व्यवस्था अब भी बरकरार

3 दिन में खत्म करने थे अटैचमेंट, महीनों बाद भी नहीं बदली तस्वीर | सीएमएचओ की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा 12 मार्च 2026 को जारी सख्त आदेश में प्रदेशभर में चल रहे सभी प्रकार के “संलग्नीकरण (अटैचमेंट)” तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि अधिकतम 3 दिनों के भीतर सभी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मी अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटकर कार्यभार ग्रहण करें तथा इसकी जानकारी उच्च कार्यालय को भेजी जाए।
लेकिन गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में शासन के इस आदेश का असर कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है। आदेश जारी होने के कई दिन बाद भी जिले में अटैचमेंट व्यवस्था बदस्तूर जारी है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जिला प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में कई स्वास्थ्यकर्मी अब भी अपने मूल पदस्थापना स्थल के बजाय अन्य केंद्रों में अटैच होकर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
डॉ. अनुराधा बिस्वास — मूल पदस्थापना: कोटमी, वर्तमान अटैचमेंट: जिला स्तर
परमजीत पैकरा — मूल पदस्थापना: नवागांव, अटैच: जिला अस्पताल
ज्योति वर्मा — मूल पदस्थापना: कोटमी, अटैच: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पेंड्रा
अभिषेक चौहान (फार्मासिस्ट) — मूल पदस्थापना: जमढी खुर्द, अटैच: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरेला
प्रभा — मूल पदस्थापना: सीलपहरी, अटैच: तेंदूमुड़ा
राजकुमार साहू — मूल पदस्थापना: शिवनी, अटैच: मरवाही
अनवर खान — मूल पदस्थापना: सेमरदर्री, अटैच: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवाही
यह सूची इस बात की ओर इशारा करती है कि शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद जिले में अटैचमेंट की व्यवस्था पूरी तरह खत्म नहीं की गई है
इस पूरे मामले में जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. रामेश्वर शर्मा की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं किया जाना प्रशासनिक लापरवाही माना जा रहा है।
अब कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं—
क्या आदेश के पालन की निगरानी नहीं की गई?
क्या जानबूझकर अटैचमेंट जारी रखा गया?
क्या कुछ कर्मचारियों को विशेष संरक्षण दिया जा रहा है?
आखिर शासन के आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इन सवालों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
अटैचमेंट व्यवस्था जारी रहने का सबसे बड़ा नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को हो रहा है। जिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपस्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत है, वहां स्टाफ की कमी बनी हुई है।
स्थिति यह है कि—
मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा
गंभीर मरीजों को जिला मुख्यालय रेफर किया जा रहा
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर पड़ती जा रही है
ग्रामीण जनता को छोटी-छोटी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
मामले की गंभीरता के बावजूद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
न तो अटैचमेंट समाप्त करने को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति बताई गई और न ही आदेश पालन की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई दी।
यह चुप्पी अब पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रही है।
आदेश सिर्फ दिखावे के लिए थे क्या?
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार निर्देश जारी कर रही है, लेकिन यदि उन्हीं आदेशों का जमीनी स्तर पर पालन नहीं हो पा रहा, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।



