खेड़ा डंगनिया में वनभूमि पर अवैध मुरूम खनन का खेल! 72 एकड़ सागौन प्लांटेशन खोखला, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर उठे सवाल
बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के खेड़ा डंगनिया स्थित वनभूमि में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध मुरूम खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि सागौन के 72 एकड़ प्लांटेशन के बीच कई महीनों से दिन-रात जेसीबी और भारी मशीनों के जरिए मुरूम निकाली जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग समय रहते इसे रोकने में नाकाम रहे। इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब 500 मीटर लंबे और 200 मीटर चौड़े क्षेत्र में 20 से 25 फीट तक गहरी खुदाई किए जाने का दावा किया जा रहा है। ड्रोन तस्वीरों में विशाल गड्ढे, उजड़ी हुई वनभूमि और बड़े पैमाने पर खुदाई के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन 100 से 200 हाईवा और ट्रेलर मुरूम लेकर क्षेत्र से निकलते रहे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल चुप्पी दिखाई दी।
सुशासन के दावों के बीच बेलतरा में खुलेआम अवैध कारोबार
राज्य सरकार जहां सुशासन और पारदर्शी प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में वनभूमि पर इतने बड़े पैमाने पर कथित अवैध मुरूम खनन कई सवाल खड़े करता है। यदि ग्रामीणों के दावे सही हैं और रोजाना भारी संख्या में वाहन मुरूम लेकर निकल रहे थे, तो सवाल यह भी है कि संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर गतिविधियां लंबे समय तक चलना प्रशासनिक सतर्कता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
क्या बिना विभागीय जानकारी के संभव था इतना बड़ा खनन?
ग्रामीणों का कहना है कि जब रोजाना सैकड़ों वाहन क्षेत्र से गुजर रहे थे, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर खनन लंबे समय तक कैसे चलता रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय नजर आया, जिससे अवैध खनन करने वालों के हौसले बढ़े।
वनभूमि और प्लांटेशन को भारी नुकसान
जिस क्षेत्र में खनन हुआ, वहां वन विभाग द्वारा विकसित सागौन प्लांटेशन मौजूद है। कई स्थानों पर पौधों के बीच रास्ते बनाकर मशीनें पहुंचाई गईं। लगातार खुदाई से विशाल गड्ढे बन गए हैं, जो बरसात में तालाब जैसे दिखाई दे रहे हैं। इससे वनभूमि और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रांसमिशन लाइन के नीचे तक खुदाई
मामले में यह भी सामने आया है कि हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइन के टावरों के नीचे तक मुरूम निकाली गई। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा भी गंभीर विषय होगा।
करोड़ों के राजस्व नुकसान का दावा
स्थानीय स्तर पर किए गए आकलन के अनुसार क्षेत्र से लाखों घनफीट मुरूम निकाली जा चुकी है, जिससे शासन को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। पूरे मामले की तकनीकी जांच होने पर वास्तविक नुकसान का आंकड़ा सामने आ सकता है।
शिकायतें हुईं, फिर भी कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन की शिकायत सुशासन तिहार सहित विभिन्न माध्यमों से प्रशासन तक पहुंचाई गई, लेकिन अब तक न तो व्यापक जांच हुई और न ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन की रोकथाम की जिम्मेदारी खनिज विभाग की है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ तो नियमित निरीक्षण, निगरानी और प्रवर्तन की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी, इसकी भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
कांग्रेस ने भी उठाया मामला, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
खेड़ा डंगनिया में कथित अवैध मुरूम खनन का मामला अब राजनीतिक तूल भी पकड़ने लगा है। दो दिन पहले कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मुलाकात कर पूरे मामले का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वनभूमि पर कथित अवैध उत्खनन, शासन को संभावित राजस्व नुकसान और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते संबंधित विभाग सक्रिय होते तो वन क्षेत्र को इतना नुकसान नहीं होता। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई।
वन विभाग का पक्ष
सीसीएफ मनोज पांडेय ने कहा कि यदि अवैध खुदाई वनभूमि के भीतर पाई जाती है तो जांच के लिए टीम भेजी जाएगी। जांच में अवैध खनन की पुष्टि होने पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर और खनिज विभाग का पक्ष नहीं मिल सका
इस पूरे मामले में प्रशासन का पक्ष जानने के लिए जिला कलेक्टर और संबंधित खनिज विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनके मोबाइल नंबरों पर कई बार कॉल किए गए, लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में कथित अवैध खनन, विभागीय निगरानी और संभावित राजस्व नुकसान को लेकर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका। यदि संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।




