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हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: 3 हफ्तों में सरेंडर करें अमित जोगी… क्या अब तय है जेल का रास्ता?

(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ की सियासत और न्यायिक गलियारों में हलचल मचाने वाला बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के ताजा फैसले ने इस लंबे समय से चले आ रहे मामले को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
जग्गी हत्याकांड में बड़ा मोड़
सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अब अमित जोगी की जेल यात्रा तय है?
“बिना सुने ही दोषी ठहरा दिया” – अमित जोगी
फैसले के बाद अमित जोगी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि अदालत ने महज 40 मिनट में सीबीआई की अपील स्वीकार कर ली और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया।
उन्होंने इसे न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा कि—
“जिस व्यक्ति को पहले ही दोषमुक्त किया जा चुका था, उसे बिना सुनवाई के दोषी ठहराना गंभीर अन्याय है।”
उन्होंने भरोसा जताया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा।
2003 की सनसनीखेज हत्या
यह पूरा मामला 4 जून 2003 का है, जब रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ में सनसनी फैला दी थी। मामले में 31 लोगों को आरोपी बनाया गया और जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी गई।
सरकारी गवाह बने आरोपी, 28 को सजा
जांच के दौरान बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए। उनके बयानों के आधार पर अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया।
हालांकि, सबूतों के अभाव में अमित जोगी को उस समय राहत मिल गई थी, जिससे यह मामला और विवादों में घिर गया।
2007 में मिली थी राहत, अब फिर संकट
31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को बरी कर दिया था। लेकिन इस फैसले को मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने चुनौती दी, जिससे मामला फिर अदालतों में जीवित हो गया।
सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक लंबी लड़ाई
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से इसे दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजा गया। अब हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने पूरे केस को फिर से निर्णायक स्थिति में ला दिया है।
अब क्या होगा आगे?
अमित जोगी के पास फिलहाल तीन सप्ताह का समय है सरेंडर करने के लिए। लेकिन वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं।
यदि उन्हें वहां से राहत मिलती है, तो स्थिति बदल सकती है—वरना गिरफ्तारी तय मानी जा रही है।
सियासत पर भी असर
यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में सक्रिय अमित जोगी के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है। अगर उन्हें राहत नहीं मिलती, तो यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।
कुल मिलाकर, जग्गी हत्याकांड एक बार फिर सत्ता, कानून और न्याय के त्रिकोण में खड़ा नजर आ रहा है—अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी है।

प्रशांत गौतम

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